Bhabhi Ki Chut Ki Kahani - चचेरे भाई की दिलकश बीवी- 2

भाभी की चूत की कहानी में पढ़ें कि भाई की बीवी को एक बार चोद लेने के बाद उसके जिस्म का नशा मेरे ऊपर चढ़ गया. मैंने उसे कैसे भोगा?

नमस्कार दोस्तो, मेरी भाभी की चूत की कहानी के पहले भाग
चचेरे भाई की नवयौवना पत्नी का आकर्षण
में आपने पढ़ा कि वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार रेनू मुझसे मिलने के लिए तैयार हुई. मैंने उसकी योनि में लिंग प्रवेश कराया और हमने चुदाई का आनंद लिया.

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कुछ समय तक वो मेरे ऊपर लेटी ही रही जब तक कि मेरा लिंग उसकी योनि से बाहर नहीं आ गया। हम दोनों के साथ हमारे दोनों महारथी भी घमासान युद्ध करके थक चुके थे।

मैंने रेनू के होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया। 10 मिनट के बाद वो बेड से उठी और कपड़े से अपनी योनि और मेरी जाँघें साफ कीं.

इस समय वो पूर्ण नग्नावस्था में थी. उसके इस मादक रूप को देखने के लिए में इतने वर्ष तरसा था। उसके शरीर का एक-एक कटाव लाजवाब था।

“अब तो चाय पीओगे या कुछ और?” उसने तंज कसते हुए पूछा.
“फ़िलहाल चाय ले आओ और भी बहुत कुछ पीना है.” मैंने उसके चूचक को दाँतों से काटते हुए बोला।

अब आगे की भाभी की चूत की कहानी:

वो किचन की ओर मुड़ी. हे ईश्वर … क्या नज़ारा था … उसके दोनों माँसल नितंबों का आपस में घर्षण देखकर बेजान से पड़े लिंग में फिर करण्ट सा दौड़ गया।

उसका गदराया हुआ जिस्म बिना कपड़ों के कहर बरपा रहा था. साक्षात रतिदेवी के रूप में थी रेनू!
मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैं फिर किचन में चला गया और उसको पीछे से दबोच लिया.

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मेरा लिंग उसके माँसल नितंबों की दरारों के बीच में फंस कर कसमसा रहा था।
“चाय तो बना लेने दो?”. उसने मुझे रोकने की कोशिश की.

मैंने कुछ नहीं सुना और घुटनों के बल बैठ गया और उसके नितंबों को चूमने लगा और एक हाथ से उसकी योनि को सहलाने लगा।

उसकी योनि फिर से गीली हो गयी थी.
अपनी दो उंगलियां योनिछिद्र के अंदर डाल कर मैं घुमाने लगा.

जैसे ही उंगलियां योनि की दीवारों से टकरातीं रेनू चिहुंक उठती। फिर से चाय और रेनू का जिस्म, दोनों उफान पर थे।

फिर मैंने अपने होंठों को उसकी योनि की पंखुड़ियों के ऊपर रखा. उसने मेरा सिर कस कर पकड़ लिया और योनि के अंदर दबाने लगी. मैंने धीरे-धीरे उसकी भगनासा को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया.

उसकी योनि ने रस छोड़ना शुरू कर दिया. मैंने एक उंगली योनिरस में गीली करके उसके गुदाद्वार में धीरे से घुसा दी. अब रेनू के लिए एक साथ योनि मुखमैथुन और गुदामैथुन सहन करना मुश्किल हो रहा था।

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फिर मैंने उसकी गुदा में दो उंगलियां घुसा दीं. उसकी हल्की सी चीख़ निकल गयी. वो चाय छानने लगी और मैं उसे गुदामैथुन का आनंद देता रहा. उसके गोल-गोल माँसल नितंब लिंग को गुदाद्वार में प्रवेश की चुनौती दे रहे थे।

उसने गाउन पहन कर अपनी बेटी को चाय-बिस्कुट और कुछ चॉकलेट देकर फिर से दरवाजा बाहर से बन्द कर दिया।
बेडरूम में आकर उसने गाउन उतार दिया. हम दोनों ने नग्नावस्था में चाय नाश्ता किया और उसने एक हसरत भरी नजरों से मेरे मुरझाये हुए लिंग को देखा।

चाय नाश्ता करने के बाद वो आकर मेरे पास लेट गयी और हम दोनों पुरानी बातें करने लगे.
इस दौरान उसके हाथ मेरे लिंग को सहलाते रहे।

मैंने उसको उल्टा लिटा कर उसकी पीठ, क़मर और नितंबों की शिलाओं को सहलाते हुए होंठों से बहुत प्यार किया।

वो पलट गई और अपने चूचक को मेरे मुँह में दे दिया. मैंने उसके चूचक से दूध निकालने का बहुत प्रयास किया और दोनों हाथों से उसके पूर्णविकसित स्तनों का मर्दन किया.

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धीरे से उसके पेट को चूमते हुए उसकी योनि पर होंठ रख दिये. शायद उसको भी मेरा योनि चूसना बहुत पसंद आ रहा था. मैंने उसकी योनि की दोनों दीवारों को थोड़ा सा खोला अंदर की ओर, योनि गुलाबी रंग की होती जा रही थी।

हल्के काले बाल उसकी योनि को और कामुक बना रहे थे.
मैंने दो उंगलियां उसकी योनि में डाल कर घर्षण शुरू किया और होंठों से उसकी योनि को चाटना जारी रखा।

रेनू के लिए अब खुद को संभालना मुश्किल हो गया था. वो अपने नितंबों को उछालने लगी थी।
उसने ना जाने कितनी बार योनिरस छोड़ा और मैं सारा योनिरस पीता गया.

वो बुरी तरह से हांफने लगी थी.
उसने मेरे लिंग को पकड़ कर मर्दन शुरू कर दिया. वो अब लिंग को योनि में समा लेना चाहती थी।

“ये तैयार क्यों नहीं हो रहा है?” वो लिंग को योनि पर रगड़ती हुई कामुक आवाज में बोली।
मैंने उसे मुखमैथुन करने को बोला. वो कुछ झिझकी मगर फिर तुरंत लिंग को मुँह में ले लिया।

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वो धीरे-धीरे मुझे मदहोश कर रही थी. मेरा लिंग पूरा खडा हो चुका था. कभी दाँतों से काटती तो कभी पूरा लिंग गले तक ले जाती. कभी अण्डकोषों को मुँह में भर कर चूसती और लिंगमुंड को जीभ से धीरे-धीरे सहलाती।

उसके मुखमैथुन ने मुझे कामवासना के स्वर्ग में पहुंचा दिया. मुझे लगने लगा कि कहीं मेरा संयम इसके मुँह में ही न टूट जाये।
“अरे कहीं मेरा वीर्य तुम्हारे मुँह में ना निकल जाए.” मैंने उसको सचेत करते हुए कहा.

वो मेरे लिंगमुंड को दांतों से काटते हुए बोली- मेरा तो सारा योनिरस ना जाने कितनी बार पी लिया और अपना एक बार भी नहीं पिलाओगे? मुझे तुम्हारे वीर्य का स्वाद लेना है।

फिर मैंने उसे थोड़ी सी पोजीशन बदलने को कहा।
अब मेरा मुँह उसकी योनि पर था और उसके मुँह में मेरा लिंग. वो कभी मुँह में ही पूरा लिंग दबा लेती, मानो अंदर से वीर्य खीचना चाहती हो और इधर मेरी जीभ उसको नितंब उछालने पर विवश कर रही थी।

मेरे अण्डकोषों को धीरे-धीरे सहलाकर वो मुझे उसकी योनि को दाँतों से काटने पर मजबूर कर देती थी। मैं भी उसकी योनि के दोनों होंठों को अपने मुँह में भर कर चूसने लगा.

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उसके मुँह में मेरा लिंग होने की वज़ह से वो सीत्कार भी नहीं पा रही थी, मगर उसके नितंब सिकुड़ जाते थे।
“मैं झड़ने वाला हूँ!” मैंने उत्तेजना को संभालते हुए कहा.

तभी उसने मेरे लिंग का अपने मुँह में और दबाव बढ़ा दिया, वो सच में सारा वीर्य निचोड़ लेना चाहती थी. लिंग ने भी उसके मुँह में झटके मारना शुरू कर दिया और लिंग ने सारा गर्म-गर्म लावा रेनू के मुँह में छोड़ दिया.

रेनू ने मेरे वीर्य की एक-एक बूंद को लिंग के अंदर से चूस लिया। उसकी योनि भी मुझे प्यासा नहीं छोड़ रही थी. इस बार उसकी योनि ने ढे़र सारा गर्म योनिरस छोड़ दिया.

उसके नितंब अकड़ से गये, मानो सारा योनिरस बाहर फेंक देना चाहते हों. मैंने सारा योनिरस चाट-चाट कर साफ कर दिया. अब उसकी योनि योनिछिद्र से अंदर तक गुलाबी दिख रही थी।

रेनू और मैं हांफने लगे।

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मगर दोनों की आंखों में एक संतुष्टि थी, जैसे आज वर्षों की प्यास बुझ गयी हो।
मैंने समय देखा तो उसने कहा- अरे अभी तो बहुत समय है, अभी तो इसको एक और चढ़ाई करनी है.
… और कहते हुए उसने मेरे लिंग को मुँह में भर लिया।

एक लाजवाब मुखमैथुन के बाद हम दोनों ने काफी देर तक आराम किया।
फिर उसने पूछा- खाने में क्या खाओगे?
“जो तुम अच्छा बनाती हो वो बना लो.” मैंने भी प्यार से जवाब दे दिया.

उसने सारी तैयारी पहले से ही कर रखी थी। वो किचन का काम बिना कपड़ों के ही कर रही थी. उसको इस तरह बिना कपड़ों में काम करते देखना सच में शब्दों में वर्णित करना मुश्किल है।

आटा गूँथते समय उसके माँसल नितंबों में जो कंपन हो रहा था वो मुझे फिर उसके पास खींच रहा था. उसके स्तन मानो आटा गूँथने में हाथों की मदद कर रहे हों।

जितनी ताकत से वो हाथ चलाती उतनी गति से उसका वक्षस्थल हिल रहा था। उसकी शारीरिक गतिविधियों ने लिंग में फिर से रक्तसंचार बढ़ा दिया।

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मैंने किचन से नारियल तेल उठाया और उसके माँसल नितंबों पर मलना शुरू कर दिया।
रेनू को मेरे लक्ष्य का अनुमान नहीं था. मैंने धीरे-धीरे उसके गुदाद्वार में नारियल के तेल से भीगी हुई उंगलियां घुसानी शुरू कर दीं।

नारियल की चिकनाहट उसे दर्द का अहसास नहीं होने दे रही थी और वो रोटियाँ बनाने में व्यस्त रही। मेरी उंगलियों ने नारियल के तेल के साथ उसके गुदाद्वार का रास्ता थोड़ा सा सुगम कर दिया.

रेनू इस अप्राकृतिक मैथुन का भरपूर आनंद ले रही थी।

फिर मैंने उसे थोड़ा सा झुकाया और गुदाद्वार को ध्यान से देखा.
छेद थोड़ा सा चौड़ा हो गया था.

अब तक रेनू आता गूँथ चुकी थी.
मैंने अपने तने हुए लिंग को नारियल के तेल में डुबोकर लिंगमुण्ड उसकी गुदाद्वार पर रखा।

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वो शायद इस हमले से अंजान थी. मैंने थोड़ा सा झुक कर एक हल्का सा झटका मारा तो लिंग छेद से फिसल गया.
मैंने थोड़ा सा नितंबों को चौड़ा कर फिर छेद पर निशाना लगाया.

इस बार लिंग उसके सँकरे गुदाद्वार में आधे से ज्यादा घुस चुका था।
रेनू के मुँह से चीख सी निकल गयी और वो सीधी खड़ी हो गयी. अपने गुदाद्वार को सहलाने लगी।

“अरे डरो मत … वैसे भी रास्ता तो बन ही गया है, अब तो मजे ले लो.” मैंने उसको मनाते हुए कहा.

मगर वो नहीं मानी.
मैंने फिर उंगलियों से गुदामैथुन जारी रखा.
नारियल का तेल उसकी गुदा में अंदर तक भर गया था.

धीरे-धीरे रेनू भी नितंबों को सिकोड़ने लगी. उसे असीम आनंद की अनुभूति होने लगी थी।

इसी समय मैंने उसे रसोई की स्लैब पर पूरा झुकाया और चिकने लिंग को गुदाद्वार में धीरे से घुसाना शुरू कर दिया.
इस बार रेनू लिंग लेने को तैयार थी.

जैसे-जैसे लिंग अंदर जा रहा था, लिंग को उतनी ही मेहनत करनी पड़ रही थी. आगे गुदा मार्ग बहुत संकीर्ण था।

अथक प्रयास और रेनू के सहयोग से पूरा लिंग उसकी गुदा में समा गया.
उसके मुँह से एक आह … निकली। मैंने धीरे-धीरे लिंग आगे-पीछे करना शुरू किया.

लिंग खींचते समय उसकी गुदा की अंदरूनी त्वचा भी लिंग के साथ खिंचती हुई सी प्रतीत होती थी.

उसका गुदा मार्ग कुछ सुगम हो गया था। अब मैंने उसके नितंबों को पकड़कर तेज-तेज धक्के लगाने शुरू कर दिये.

मेरे हर धक्के पर वो आह-आह … करने लगी. उसके स्तन भी धक्कों के साथ उछल पड़ते थे।
“और तेज … और अदंर डालो … फाड़ दो आज … आह्ह … और तेज … और तेज!” कहते हुए वो धीरे-धीरे बड़बड़ाने लगी,

10 मिनट के भरपूर गुदामैथुन का रेनू ने सम्पूर्ण आनन्द लिया.
स्खलन से पूर्व मैंने पूछा- अन्दर छोड़ दूँ या मुँह में लोगी?

उसने तुरंत पलट कर पूरा लिंग मुँह में ले लिया. मानो किसी बच्चे को लॉलीपॉप मिल गया हो. वो सब कुछ भूल कर लिंग को चूसने लगी.

कभी मेरे अण्डकोषों को सहलाती और कभी लिंग को हाथ में लेकर मसल देती. फिर एक झटके में सारा गर्म लावा उसके मुँह में छूट गया। उसने वीर्य की एक-एक बूंद पी ली और मैं लगभग निढाल सा हो गया।

मैं जितनी बार उसके माँसल नितंब देखता, पता नहीं कहाँ से लिंग में जान आ जाती. आज सुकून था कि उसके नितंबों का भी भोज कर लिया था।

फिर उसने खाना बना लिया.
वह अपनी बेटी को खाना देने गयी तो वो गहरी नींद में सो रही थी. रेनू ने उसके कमरे का दरवाजा फिर से बंद कर दिया.

हम दोनों ने फिर नग्नावस्था में ही भोजन किया. शायद आज हम दोनों ने कपड़े न पहनने की कसम खा रखी थी।

खाना खाने के बाद हल्की सी नींद आ गयी. फिर अचानक आँख खुल गयी तो देखा कि रेनू मुँह में लिंग लिए चूस रही थी.

शायद उसकी योनि अभी भी प्यासी थी.
थोड़ी ही देर में उसने मेरे लिंग में फिर रक्तसंचार भर दिया और वो पुनः चढ़ाई के लिए तैयार हो गया।

मैंने रेनू को सीधा पीठ के बल लिटाया. उसकी दोनों टांगों को घुटनों से मोड़कर थोड़ा सा चौड़ा कर दिया और उसकी योनि को होंठों से चूसना शुरू कर दिया.

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जीभ को उसके गुदाद्वार से योनिछिद्र तक फिराना शुरू कर दिया और जैसे ही जीभ योनिछिद्र के अंदर जाती, वो कांप उठती.

रेनू फिर से गर्म होकर नितंबों को उछालने लगी। इस बार मैंने उसके योनिछिद्र पर लिंगमुंड रख कर एक जोरदार झटका मारा. पूरा लिंग एक बार में ही अंदरूनी दीवारों से जाकर टकरा गया.

इस जोरदार आक्रमण से रेनू चीख पड़ी और मुझे कसकर दबोच लिया।
मैंने उसके खड़े हो चुके चूचकों को चूसना शुरू कर दिया. अब लिंग को उसकी उम्मीद से ज्यादा धीमे-धीमे आगे-पीछे करना शुरू कर दिया.

वो मेरे नितंबों को दबा कर लिंग को और गहराई में ले जाने लगी।
जैसे जैसे घर्षण बढ़ रहा था, उसके नितंबों में भी उछाल आना शुरू हो गया. मैं बीच में धक्के बन्द कर देता तो वो नितंबों को उठा देती।

उस दिन उसे स्लो मोशन में मैथुन कर मैंने बहुत तड़पाया. फिर उसको घोड़ी बनने को बोला तो वो तुरंत बन गयी।
बाप रे … घोड़ी बनते ही उसके माँसल नितंब और बड़े लगने लगे. मैंने लिंग उसके योनिछिद्र पर लगाया और तेज गति से प्रहार शुरू कर दिया. रेनू भी यही चाहती थी.

मेरे हर झटके से उसके स्तन झूले की तरह हिल जाते और एक दो बार मैंने लिंग उसके गुदाछिद्र में भी डाल दिया. मगर वो योनि की संतुष्टि चाहती थी। मेरे हर धक्के पर वो आह-आह और कामुक सीत्कार निकाल रही थी।

उसे योनि के अंतिम पड़ाव पर लिंग का टकराना मदहोश कर रहा था. उसके माँसल नितंबों के बीच से लिंग अंदर-बाहर जाना मुझे रोमांचित कर रहा था। जिन नितंबों की कल्पना में मैंने कितनी बार वीर्य बहाया था, आज उन दोनों माँसल नितंबों के ऊपर मेरा अधिकार था.

इतने में ही रेनू ने योनिरस छोड़ दिया और मुझे रुकने को कहा. मैंने उसके योनिछिद्र से रस से सना हुआ लिंग बाहर निकाला। लिंग बाहर निकलते ही रेनू ने मुँह में लेकर साफ कर दिया.

अब मेरी बारी थी. मैंने उसकी दोनों टाँगें चौड़ी करके उसकी योनि का सारा योनिरस साफ कर दिया. मेरे खड़े लिंग को देखकर रेनू मेरे ऊपर चढ़ गई और उसने लिंग के ऊपर तीव्र गति से उछलना शुरू कर दिया।

मेरा लिंग भी चरम आकार में आकर उसकी योनि की गहराई को नाप रहा था। उसके उछलते हुए स्तनों को देखकर लिंग और जोश में आ रहा था। कामयुद्ध अब अंतिम चरण में था. कोई भी योद्धा हार मानने को तैयार नहीं था।

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उसकी योनि संकुचित होकर मेरे लिंग को अंदर ही अंदर दबाने लगी।
पूरा बेडरूम आहों, कामुक सीत्कारों और शारीरिक घर्षण की मधुर आवाज़ों से गूँज रहा था। अचानक रेनू ने उछलने की गति बढ़ा दी.

अब मेरे लिए संयम मुश्किल हो गया। सच में … इस मैथुन में रेनू ने मुझे हरा दिया था. अब वो हिंसक होकर अपने नितंबों से मेरी जांघों पर प्रहार कर रही थी।

एक वो क्षण आया … जब दोनों का गर्म लावा एक साथ निकला। रेनू निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गयी.
मैंने उसके होंठों को चूम लिया और कहा- तुमने आज मुझे तृप्ति दी है, जो मुझे आज मिला है उसकी तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी.

अब हम पूर्णरूप से संतुष्ट हो चुके थे मगर साथ ही थक भी चुके थे। मैंने कपड़े पहनने शुरू किए. वो अभी भी नग्नावस्था में लेटी हुई थी. उसका योनिछिद्र थोड़ा सा खुल सा गया था।

शायद वो अभी भी एक युद्ध के लिए तैयार थी लेकिन समय को ध्यान में रखकर मैं चलने लगा।

उसने जाने से पहले उसी नग्नावस्था में मेरे लिए चाय बनाई.

उसके नितंबों का उठाव आज कुछ ज्यादा लग रहा था. शायद मेरे लिंग ने उसके नितंबों को थोड़ा चौड़ा कर दिया था। मैंने चाय बनने के समय में उसके नितंबों को चूमा और सहलाया.

अगर समय का अभाव न होता तो लिंग फिर से नितंबों पर प्रहार के लिए खड़ा हो गया था।

चाय पीकर उसने मुझसे फिर आने का वादा लिया और उसके नितंबों पर एक चपत लगा कर मैं घर से निकल दिया।
भाभी की चूत की कहानी पर अपनी राय भेजते रहें.

भाभी की चूत की कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.

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इस कहानी का अगला भाग: चचेरे भाई की दिलकश बीवी- 3