मुंबई बैंक के ऑफिस में सिस्टम रूम में रश्मी के साथ हुई जोरदार चुदाई की पूरी हॉट कहानी। टाइट जींस वाला लंड, गीली चूत, ब्लोजॉब और बैक साइड फकिंग – पढ़िए ये सेक्सी ऑफिस सेक्स स्टोरी और मजे लीजिए।
मैं मुंबई की एक मल्टीनेशनल बैंक में हार्डवेयर इंजीनियर हूँ। उम्र 25 साल, और मेरा लंड सात इंच लंबा है – मशरूम जैसा मोटा सिर, जो देखते ही किसी भी लड़की का दिल और चूत दोनों गीली कर दे। ऑफिस में रोज़ पैरेलल पैंट पहनता हूँ, क्योंकि ड्रेस कोड है। लेकिन शनिवार को कैजुअल डे होता है, तो मैं टाइट ब्लैक जींस पहन लेता हूँ। वो जींस मेरे लंड को इतना अच्छे से दबाती है कि उसका आकार साफ नजर आता है। मुझे लड़कियों के नज़रों में वो भूख बहुत पसंद आती है – जब वो मेरे लंड को घूरती हैं, तो मेरा मन करता है कि बस उसी वक़्त उन्हें चोद दूँ।
आईटी डिपार्टमेंट में होने की वजह से रोज़ ढेर सारे कॉल्स आते हैं। मैं खासतौर पर शनिवार को लेडीज़ के कॉल्स खुद अटेंड करता हूँ। ऑफिस में एक लड़की है – निशा। उसकी बातचीत से मुझे ज़्यादा मज़ा आता है। उसका फिगर कमाल का है – गोल-गोल बड़े स्तन, और कूल्हे इतने मोटे और मुलायम कि मेरी हर थरकन को सहारा दे सकें। लेकिन निशा से ज़्यादा ध्यान मुझे रश्मी की तरफ़ जाता है।
वो फॉरेक्स डिपार्टमेंट संभालती है, छोटी कद की, लेकिन उसकी चूत और स्तनों की भूख मुझे हमेशा छेड़ती रहती है। वो हर मौके पर अपने स्तनों को मेरे कंधे से रगड़ती रहती है, जैसे कह रही हो – “देखो न, ये तुम्हारे लिए हैं”। निशा से मेरी ज़्यादा बातें देखकर रश्मी जलती रहती है। वो अक्सर झगड़ती भी है, लेकिन मैं जानता हूँ – वो मेरे लंड के लिए ही इतना बेचैन है।
31 दिसंबर को ऑफिस में देर रात तक काम था – साल का आखिरी दिन। हर महीने के आखिरी कामकाजी दिन की तरह मुझे रुकना पड़ता है। शाम को रश्मी मेरे पास आई, कान में फुसफुसाई, “क्या मैं तुम्हारा इंतज़ार करूँ?” मैं समझ नहीं पाया, तो उसे घर जाने को कह दिया। वो नाराज़ होकर चली गई। थोड़ी देर बाद उसका मैसेज आया – “कितना बेवकूफ़ हो तुम, मुझे जाने को क्यों कहा?” अब मुझे समझ आ गया। ऑफिस खाली होता तो हम दोनों अकेले कुछ भी कर सकते थे। मैंने रिप्लाई नहीं दिया, बस अगले दिन का इंतज़ार करने लगा।
मैं बॉस के पास गया और बोला, “सर, आज सिस्टम बैकअप लेना है, देर लगेगी।” बॉस ने हामी भर दी और बोला, “कल रविवार है, पियन से चाबियाँ ले लो।” मैंने चाबियाँ लीं, पियन को जल्दी घर भेज दिया। रश्मी को मैसेज किया – “चाबियाँ मेरे पास हैं।” दिन भर का काम खत्म होने के बाद सारे लोग चले गए। रश्मी भी। ऑफिस बिल्कुल खाली था। मैंने मेन डोर अंदर से बंद कर लिया, ताकि कोई अंदर आ जाए तो पता चले। शाम के छह बज चुके थे। मुझे लगा शायद आज बैकअप लेने का फैसला बेकार गया।
लगभग 15 मिनट बाद मेरे फोन पर बीप हुआ। मैसेज था – “प्लीज़ डोर खोल दो।” मैं सीधा दरवाज़े पर पहुँचा। खोला तो रश्मी खड़ी थी – काली स्कर्ट, स्काई ब्लू टॉप। उसकी स्कर्ट इतनी छोटी थी कि उसके मोटे कूल्हे आधे दिख रहे थे। मैंने उसे अंदर आने दिया और फिर से दरवाज़ा बंद कर दिया। बिना एक शब्द बोले हम दोनों सिस्टम रूम में चले गए। कमरा अंधेरा था, सिर्फ़ मॉनिटर की नीली रोशनी थी। हवा में उसकी परफ्यूम की खुशबू और मेरे लंड की भूख घुली हुई थी।
वो मेरे बिल्कुल पास खड़ी हो गई। मैंने बैकअप कमांड शुरू किया – 30 मिनट लगने वाले थे। फिर उसकी आँखों में देखा। उसकी नज़र में वही भूख थी जो मैं महीनों से देख रहा था। वो धीमी, मीठी आवाज़ में बोली, “कोई आएगा तो नहीं ना?” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं यार, चाबियाँ मेरे पास हैं। आज तो पूरा ऑफिस हमारा है।” जवाब का इंतज़ार किए बिना उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को बाहर से दबा दिया। मेरी जींस के ऊपर से ही वो महसूस कर रही थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया – क़ुतुब मीनार जैसा।
मैंने उसे गोद में उठाया और बॉस के रूम में ले गया, जहाँ VIP के लिए सोफ़ा था। सोफ़े पर बैठा और उसे अपनी गोद में बिठाया। वो फिर से मेरे होंठ चूमने लगी – इस बार धीरे-धीरे, प्यार से। फिर नीचे झुकी, मेरे सीने पर किस किए, पेट पर, और फिर मेरे लंड को मुंह में ले लिया। गर्म, गीली जीभ से वो ऊपर-नीचे चूस रही थी। “कितना मोटा और स्वादिष्ट है तेरा लंड,” वो बोलती रही। “मैं रोज़ सपने में यही चूसती थी।” मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों के बीच सरकाया। उसकी चूत पहले से ही तर थी। उँगली डाली तो वो और ज़ोर से लंड चूसने लगी। फिर उसने मेरे लंड को निकाला और गेंदों को चूसने लगी। “तेरा लंड इतना बड़ा है… सिर्फ़ मैं ही इसके लिए लड़ती थी,” वो हाँफते हुए बोली।
मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसे सोफ़े पर लिटाया, उसकी टाँगें फैलाईं और उसकी गीली गुलाबी चूत को चूसने लगा। वो तड़प उठी, “बस करो ना… बहुत मजा आ रहा है… पहले कभी इतना मजा नहीं आया।” उसने मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत पर और जोर से दबाया। मेरी जीभ अंदर-बाहर कर रही थी, क्लिटोरिस चूस रही थी। वो बार-बार काँप रही थी। “और करो ना… मुझे और बेचैन मत करो… बस चोद दो अब।”
मैं ऊपर आया, उसके स्तनों को चूसने लगा। पूरे स्तन मुंह में ले लिया। वो कराह रही थी, “मेरी चूत देखो… कितनी तर हो रही है तेरे लिए… अब डाल दो… मैं इस रात के लिए बहुत तड़प चुकी हूँ।” मैंने अपना लंड पकड़ा, उसके चूत के मुँह पर रगड़ा, फिर धीरे-धीरे अंदर डाला। पहले सिरा गया, फिर पूरा लंड। वो आँखें बंद करके मुँह से मीठी-मीठी सिसकारियाँ निकाल रही थी – “हाँ… यही… गहरा डालो ना… बहुत अच्छा लग रहा है।” मैंने धीरे-धीरे रिदम बनाया। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी।
लगभग 45 मिनट बाद मैंने कहा, “मैं आने वाला हूँ।” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “पूरा मेरी चूत में भर दो… गर्म-गर्म… मुझे अपनी चूत में महसूस करा।” मैंने पूरा लोड उसके अंदर छोड़ दिया। वो भी काँप उठी, अपनी चूत को मेरे लंड से और कसकर दबाया। हम तीन बार चोदे उस रात – हर बार पहले से ज़्यादा गहरा, ज़्यादा प्यार भरा, ज़्यादा भूखा। हर बार वो मुझे और पास खींचती, और कहती, “मत निकालो… और अंदर रहो… मैं तुम्हारी हूँ आज।”
सुबह जब हम अलग हुए, वो मुस्कुराई और बोली, “कल लंच रूम में सबको बता दूँगी… कि कितना कमाल का लंड है तेरा।” और सचमुच, अगले दिन लंच रूम में वो सब लड़कियों को सब कुछ बता रही थी – अपनी चूत की खुशी, मेरे लंड की तारीफ़… और मैं चुपचाप मुस्कुरा रहा था। ऑफिस अब पहले से ज़्यादा मज़ेदार हो गया था।