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दोस्त की पत्नी प्रीति के साथ पहली रात की चुदाई
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Dost Ki Patni Preeti Ke Sath Pahli Raat Ki Garam Chudai

चंडीगढ़ में दोस्त हरदीप की खूबसूरत पत्नी प्रीति के साथ हुई गर्मागर्म चुदाई। राहुल ने उसे औरत बनाया, कई पोजिशन्स में मजा लिया। पढ़ें पूरी अंतर्वासना भरी हिंदी सेक्स स्टोरी।

मेरा नाम राहुल है। चंडीगढ़ की उन हरी-भरी, शांत गलियों में रहता हूँ जहाँ सुबह की ठंडी हवा में नीम और अमरूद के पेड़ों की खुशबू फैली रहती है। मेरी लंबाई 5 फुट 11 इंच है, जिम की वजह से कसा हुआ शरीर, चौड़ी छाती, मजबूत भुजाएँ और वो चेहरा जो लोग अक्सर “मॉडल जैसा” कहकर तारीफ करते हैं। 

सड़क पर, बाजार में या कॉलेज के दिनों में लड़कियाँ और भाभियाँ चुपके-चुपके निहारतीं, मुस्कुरातीं या नजरें मिलाकर शरमा जातीं। लेकिन मेरी जिंदगी में कभी कोई गंभीर रिश्ता नहीं बना। शायद इसलिए कि मेरा दिल हमेशा दोस्ती और परिवार जैसी भावनाओं में उलझा रहा।

यह कहानी मेरी नहीं है। यह मेरे सबसे करीबी दोस्त हरदीप और उसकी प्यारी पत्नी प्रीति की है। यह कहानी प्यार की है, विश्वास की है, सहमति की है और उस गहरी चाहत की जो कभी-कभी दोस्ती की दीवारों को पार कर लेती है—बिना किसी को ठेस पहुँचाए, बिना जबरदस्ती के, बस आपसी समझ और भावनाओं के बहाव में।

हरदीप और मैं कॉलेज के पहले दिन से साथ थे। वही हँसी-मजाक, वही रातों को छत पर बैठकर सिगरेट पीते हुए सपनों की बातें, वही एग्जाम के दिनों में एक-दूसरे को रटवाना। बाद में किस्मत ने हमें एक ही बैंक में नौकरी दी। हम दोनों मिडिल मैनेजमेंट में थे—हरदीप क्रेडिट डिपार्टमेंट में, मैं ऑपरेशंस में। जिंदगी सेट लग रही थी।

हरदीप की शादी को अभी दो महीने भी नहीं हुए थे। प्रीति… उफ्फ! पहली बार जब मैंने उसे देखा, तो लगा जैसे कोई फिल्मी हीरोइन मेरे सामने खड़ी हो। गोरी, चिकनी त्वचा जो चाँदनी रात जैसी चमकती थी, बड़ी-बड़ी आँखें जिनमें हमेशा एक expressive चमक रहती, होंठ गुलाबी और हमेशा हल्की-सी मुस्कान लिए हुए। फिगर 34-28-36 परफेक्ट कर्व्स, कमर पतली, कूल्हे थोड़े भरे हुए, और वो चाल जिसमें एक अलग ही अदा थी। शादी के बाद जब वो साड़ी पहनकर घर में घूमती, तो लगता जैसे घर की रौनक बढ़ गई हो।

मैं उसे रोज देखता। सुबह जब वो किचन में नाश्ता बनाती, बालों में गजरा लगाए, तो मन ही मन सोचता—कितनी खुशनसीब है हरदीप। लेकिन कभी कुछ कहा नहीं। दोस्ती का सम्मान था। कभी-कभी वो मुझे “राहुल जी” कहकर बुलाती, और मैं “प्रीति भाभी” कहकर जवाब देता। वो शरमाती, हँसती, और बात खत्म।

हम तीनों एक ही मोहल्ले में रहते थे। हरदीप का किराए का घर मेरे फ्लैट से करीब 15 मिनट पैदल। एक शाम हरदीप मेरे पास आया। चेहरा उदास था। “यार, मकान मालिक रोज फोन करता है। किराया बढ़ाने की धमकी दे रहा है। नया घर ढूँढ रहा हूँ, लेकिन चंडीगढ़ में सब महँगा।” मैंने बिना सोचे कहा, “अरे पागल, मेरा घर तो तीन BHK है। मैं अकेला रहता हूँ। तुम दोनों आ जाओ। किराया क्या, बस साथ में खाना-पीना। घर परिवार जैसा हो जाएगा।”

हरदीप की आँखें भर आईं। “सच में यार? इतना बड़ा एहसान…” मैंने हँसकर कहा, “एहसान क्या, दोस्ती है।”

एक महीने बाद वो दोनों मेरे घर शिफ्ट हो गए। प्रीति ने घर को इतने प्यार से सजाया, जैसे ये उसका अपना सपनों का घर हो। सुबह उठकर गरमागरम पराठे, आलू की सब्जी, दही, चाय। शाम को चाय के साथ पकौड़े या समोसे। घर की साफ-सफाई, कपड़े धोना, सब कुछ वो संभालती। मैं ऑफिस से थका लौटता, तो वो दरवाजे पर खड़ी मुस्कुराती, “आइए राहुल जी, आज थक गए लगते हैं। चाय बनाई है, गरम-गरम।”

उसकी मुस्कान में एक अजीब सी गर्माहट थी। धीरे-धीरे हमारी बातें बढ़ीं। पहले सिर्फ “कैसा रहा ऑफिस?” फिर “आज क्या बनाया?” फिर फिल्मों, गानों, किताबों की बातें। वो शरमाती, लेकिन आँखों में चमक साफ दिखती। कभी-कभी जब वो मेरे सामने झुककर कुछ रखती, तो उसकी ब्लाउज से थोड़ा सा cleavage दिख जाता। मैं नजरें फेर लेता, लेकिन दिल की धड़कन तेज हो जाती।

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एक शाम हरदीप ने मुझे पार्क में बुलाया। सूरज ढल रहा था। वो बेंच पर बैठा था, सिर झुकाए। मैं पास बैठा तो बोला, “यार… शादी के बाद भी… हमारी सुहागरात पूरी नहीं हो पाई।” उसकी आवाज काँप रही थी। “शारीरिक कमजोरी… डॉक्टर कहते हैं स्ट्रेस, थकान, हार्मोनल इम्बैलेंस। मैं खुद को दोष देता हूँ। प्रीति को कुछ कह नहीं पाता। वो समझती है, लेकिन मैं देखता हूँ उसकी आँखों में वो अधूरी चाहत।”

मैं चुप रहा। फिर उसे गले लगाया। “चिंता मत कर। डॉक्टर दिखा, दवा ले, एक्सरसाइज कर। सब ठीक हो जाएगा। लेकिन इन दिनों तुझे उत्तेजना से दूर रहना होगा।”

वो हँसा, आँसू पोछते हुए। “मजाक मत कर। अच्छी बात है कि 10 दिन की ऑफिशियल ट्रेनिंग पर जा रहा हूँ दिल्ली। प्रीति यहीं रहेगी। तू उसका ख्याल रखना, यार।”

मैंने कहा, “बिल्कुल। तू टेंशन मत ले।”

उस दिन शाम हरदीप एयरपोर्ट के लिए निकल गया।

जब मैं घर लौटा, तो पूरा घर किसी सपने में बदल चुका था। लाइट्स मद्धिम थीं। बेडरूम में ताजा गुलाब की लाल पंखुड़ियाँ बिखरी हुईं। मोमबत्तियाँ जल रही थीं—सुगंधित, हल्की रोशनी फैला रही। हवा में लैवेंडर और चंदन की खुशबू। और प्रीति…

वो सुहाग की लाल साड़ी में सजी खड़ी थी। लाल जॉर्जेट साड़ी, जिसमें हल्का-सा वर्क था। ब्लाउज टाइट, उसके खड़े, गोल स्तन साफ उभरे हुए। माथे पर सिंदूर, हाथों में गहरी मेहंदी, बाल खुले लहराते हुए। वो नई-नवेली दुल्हन लग रही थी जो अपने महबूब का इंतजार कर रही हो।

वो मुड़ी। धीरे से दरवाजा बंद किया। पल्लू सरक गया। उसकी कमर नंगी हो गई। मैं ठिठक गया। उसकी आँखों में शरम थी, लेकिन गहरी, जलती हुई चाहत भी।

मैंने धीरे कहा, “प्रीति… आज तुम… सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो।”

वो शरमाकर नीचे देखने लगी, लेकिन होंठों पर मुस्कान थी। मैं पास गया। उसका हाथ पकड़ा। उसने विरोध नहीं किया। मैंने उसके गाल पर हाथ फेरा। उसकी त्वचा इतनी नरम थी कि लगा जैसे रेशम हो। फिर धीरे से अपने होंठ उसके होंठों से छुए। वो मेरे साथ बह गई। वो पहली किस गहरी थी—नरम, गीली, लंबी। जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। समय रुक सा गया।

मैंने उसके स्तनों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाया। वो सिसकारी—”आह्ह… राहुल…”

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“राहुल… आज हम अकेले हैं। हरदीप ने मुझे तुम्हारे भरोसे छोड़ा है। वो जानता है कि मैं तुम पर भरोसा करती हूँ। और मैं… मैं चाहती हूँ कि ये रात हमारी हो। मैं चाहती हूँ कि कोई मुझे औरत बनाए।”

उसकी आवाज काँप रही थी, लेकिन इरादा पक्का था।

मैंने उसे गोद में उठाया। वो हल्की थी। बेड पर ले जाकर रखा। धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारे। ब्लाउज की बटनें खोलीं। ब्रा उतारी। उसके गुलाबी निप्पल्स खड़े थे—ठंड से या उत्तेजना से। मैंने उन्हें प्यार से चूमा। जीभ से चाटा। हल्के से चूसा। वो कराह रही थी—”राहुल… कितना अच्छा… और करो… और जोर से…”

फिर साड़ी खींचकर उतारी। पेटीकोट गिराया। वो सिर्फ पतली लाल पैंटी में। मैंने भी अपने कपड़े उतारे। उसने मेरे लिंग को देखा। आँखें फैल गईं। शरमाकर मुस्कुराई—”वाह… इतना मजबूत… इतना लंबा… हरदीप का… इतना नहीं है।”

उसने हाथ बढ़ाकर उसे सहलाया। फिर मुँह में लिया। गर्म, नरम मुँह। वो चूस रही थी—धीरे-धीरे, फिर गहराई तक। हम 69 में आए। मैंने उसकी चूत को जीभ से चाटा। वो पहले से गीली थी। मीठी-मीठी। उसकी चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। वो मेरे लिंग को गहरे तक ले रही थी। दोनों की साँसें तेज।

फिर मैंने उसके पैर फैलाए। लिंग उसकी चूत पर रखा। वो बोली, “धीरे… पहली बार है मेरा… सच में।” मैंने उसके होंठ चूमे, स्तनों को दबाया, और बहुत धीरे अंदर धकेला। वो सिहर गई। लेकिन दर्द नहीं—बस मीठी ऐंठन। मैं रुक-रुककर अंदर गया। पूरी तरह अंदर होने पर वो मुस्कुराई—”अब… मजे लो राहुल… जोर से…”

मैंने धीरे रिदम बनाया। वो नीचे से कमर हिला रही थी। कमरे में सिर्फ सिसकारियाँ—”आह… राहुल… और जोर से… हाँ… ऐसे ही… और गहरा… और तेज…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें दबाया, चूसा। आखिर में मैंने उसके अंदर ही झड़ दिया। गरम-गरम। वो भी साथ में झड़ गई—शरीर काँप उठा, आँखें बंद, होंठों पर संतुष्ट मुस्कान।

हम थककर लेट गए। मैंने उसे गले लगाया। वो फुसफुसाई—”शुक्रिया राहुल… आज तुमने मुझे औरत बना दिया। मैंने कभी इतना महसूस नहीं किया।”

उस रात हमने कई बार प्यार किया। पहली बार के बाद हम शावर में गए। पानी के नीचे एक-दूसरे को सहलाया। फिर बाथरूम में ही मैंने उसे दीवार से सटाकर किया। फिर बेड पर वापस—कभी मिशनरी, कभी डॉगी, कभी वो ऊपर। सुबह तक चार बार हम एक-दूसरे में खो गए। हर बार नया जोश, नई गहराई।

अगले 9 दिन हमने खूब इंटिमेसी एंजॉय की। सुबह उठकर बिस्तर पर ही। दोपहर में जब वो किचन में होती, तो पीछे से जाकर गले लगाता। शाम को फिल्म देखते हुए। रात को लंबी-लंबी बातें करते हुए। मैंने उसे हर तरीके से प्यार करना सिखाया। उसे बताया कि कैसे अपने शरीर को सहलाना है, कैसे आत्मविश्वास रखना है। “हरदीप जब लौटेगा, तो तुम उसे इतना प्यार दोगी कि वो कभी उदास नहीं होगा।”

मैंने उसे हर पोजिशन सिखाई। उसे बताया कि कैसे मर्द को खुश करना है। वो सीखती गई, उत्सुकता से। उसका कॉन्फिडेंस बढ़ता गया।

जब हरदीप लौटा, प्रीति पूरी तरह तैयार थी। उसकी आँखों में अब वो अधूरी चाहत नहीं थी—बल्कि आत्मविश्वास था। वो हरदीप को गले लगाकर बोली, “आज से हमारी असली सुहागरात शुरू होती है।”

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और मैं खुश हूँ। मैंने एक दोस्त की जिंदगी संवारी। बिना किसी को ठेस पहुँचाए। बिना किसी राज को तोड़े। बस प्यार, चाहत, विश्वास और पूरी सहमति से।

ये थी वो रातें—जो मेरे दिल में हमेशा याद रहेंगी।

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