एक 33 साल की शादीशुदा औरत जमीला की सच्ची लगने वाली गर्मागर्म कहानी, जिसमें अजनबी से फोन पर बातचीत से शुरू होकर घर में गुप्त मुलाकात और Passionate Sex तक का सफर। पढ़ें ये रोमांचक हिंदी सेक्स स्टोरी जिसमें प्यार, लालसा और संतुष्टि की पूरी दुनिया है।
मेरा नाम जमीला रियाज़ है। उम्र 33 साल। शादी को 12 साल हो चुके हैं और हमारे दो प्यारे बच्चे हैं। मेरे शौहर बहुत प्यार करने वाले इंसान हैं, हमेशा मेरी ख़याल रखते हैं। मेरा फिगर अच्छा है—ब्रेस्ट 36, वजन 61 किलो, लंबाई 5 फुट 6 इंच। गोरी रंगत, कमर से थोड़े ऊपर हेयर, और होंठ भारतीय एक्ट्रेस कंगना रनौत जैसे मोटे-भरे। लेकिन आज मैं अपनी वो कहानी सुनाने जा रही हूँ जो मेरी ज़िंदगी का सबसे अनोखा और रोमांचक हिस्सा बन गई।
एक दिन, जैसा रोज़ का रूटीन था—बच्चे स्कूल गए, शौहर काम पर। मैं घर की सफाई कर रही थी। तभी फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से एक मर्द की आवाज़ आई, बहुत नरम, सम्मान भरी—”जी, सदाक़त अली साहब से बात हो सकती है?”
मैंने कहा कि ग़लत नंबर है। लेकिन उन्होंने मेरा नाम पूछ लिया। अनजाने में मेरा मुँह से निकल गया—”जमीला”। बाद में खुद पर बहुत गुस्सा आया कि एक अजनबी को अपना नाम कैसे बता दिया। फिर उन्होंने मेरा इलाका पूछा। मैंने कहा कि अगर नंबर ग़लत है तो इलाका जानने की क्या ज़रूरत। और फोन काट दिया।
अगले दिन फिर वही समय, वही आवाज़। इस बार मैं थोड़ी नाराज़ हुई—”ऐसे लोग फोन पर लोगों को तंग करते रहते हैं।” उनकी आवाज़ भारी हो गई, जैसे दुखी हो गए हों। उन्होंने बताया कि उनकी बीवी को गुज़रे दो साल हो गए। कोई औलाद नहीं। दुनिया में बहुत अकेले हैं। मेरी आवाज़ उनकी बीवी से मिलती-जुलती लगी, इसलिए बस दो मिनट बात करना चाहते थे, तन्हाई कम हो जाए।
मुझे अफसोस हुआ। शर्मिंदगी भी। सोचा, क्या हो जाता अगर मैं उनकी बात सुनकर दिल हल्का कर देती? मैंने माफी माँगी और फोन रख दिया।
कुछ दिनों तक बातें होती रहीं। उनकी बीवी के बारे में, उनकी ज़िंदगी के बारे में। फिर उन्होंने मेरे बारे में पूछा। मैंने बस इतना बताया कि शादीशुदा हूँ, दो बच्चे हैं, शौहर बिज़नेसमैन हैं। बातें 5-10 मिनट की होतीं, फिर मैं शौहर के आने का बहाना बनाकर फोन रख देती।
अगले दिन फोन आया। सलाम-दुआ के बाद बातें अलग-अलग टॉपिक पर होने लगीं—उनका बिज़नेस, फैमिली, मेरी डेली रूटीन, बच्चों की पढ़ाई, शौहर की टाइमिंग, मौजूदा हालात। ज़्यादातर वो बोलते, मैं सुनती। उस दिन 35 मिनट बात हुई। उन्होंने बताया नाम जहांज़ेब (ज़ैब), उम्र 39।
फिर रोज़ बात होने लगी। कभी 50 मिनट, कभी एक घंटे से ज़्यादा। हम एक-दूसरे को समझने लगे। उनकी आवाज़ में एक अजीब-सा जादू था, मिठास थी। मैं इतनी खुल गई कि कभी-कभी बता भी देती कि आज शौहर ने मेरे साथ कितनी बार प्यार किया।
ज़ैब अब मिलने का ज़ोर देने लगे। हर बार मैं बहाना बनाती। लेकिन दिल में एक उत्सुकता थी। आखिर एक दिन मैंने हाँ कर दी।
मंगलवार था। सिटी पार्क में मिलने का फैसला। मैंने पिंक कॉटन सलवार-कमीज़ पहनी, नीचे ब्लैक ब्रा। गर्मी थी, इसलिए शमीज़ नहीं पहनी। कमीज़ के नीचे से ब्रा की स्ट्रिप्स और आगे से हल्के किनारे दिख रहे थे। पार्क पहुँची, चादर उतारी, सिर्फ दुपट्टा लिया।
ज़ैब को उनकी बताई ड्रेस से पहचान लिया—जीन-शर्ट में 5.9 फुट का स्मार्ट आदमी। मिलते ही खुशी हुई। उनकी बातों में जादू था। पता नहीं कब उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया। वो ऐसे बैठे कि उनकी जाँघ मेरी जाँघ से छू रही थी। एक अजीब सुखद एहसास।
फिर उनकी एल्बो मेरे बाएँ ब्रेस्ट से दो बार हल्के से टच हुई। मैं समझ गई। हम वॉक करने लगे। उन्होंने एक तरफ इशारा किया—”चलो, वहाँ चलते हैं।”
वो टॉयलेट्स के पीछे की शांत जगह थी। दिल की धड़कन तेज़। वहाँ पहुँचकर उन्होंने मुझे गहरी नज़रों से देखा। मेरे बदन पर नज़रें टिकाईं। फिर मुझे अपनी बाँहों में खींच लिया। हमारा बदन हिप तक सटा। उनका एक हाथ मेरी कमर पर, दूसरा हिप्स के ऊपर। मैंने भी उन्हें ज़ोर से दबाया। आँखें बंद। दुपट्टा गिर चुका था। मेरी छातियाँ उनकी छाती से दबीं।
कुछ देर बाद बाहर निकले। दो घंटे बाद घर पहुँची। मन में खुशी, उनके लम्हे याद आते। होंठों पर मुस्कान। एक नए मर्द के स्पर्श ने प्यास जगा दी। उनकी साँसों की महक अभी भी महसूस हो रही थी।
अगले दिन फोन पर कहा—”अगली मुलाकात तुम्हारे घर पर।” मैंने मना किया। उन्होंने कहा—”देखते हैं।” फिर बताया कि कल सुबह एक मेडिसिन देंगे, लिक्विड में मिलाकर फैमिली को पिला दूँ। सब सो जाएँगे। मैंने हाँ कर दी।
अगले दिन 11 बजे गेट पर पाउडर दिया। रात को खाने के बाद शौहर और बच्चों के दूध में मिलाया। सब सोते ही बेहोश। मैंने स्काई ब्लू सलवार-कमीज़ पहनी, ब्लैक ब्रा। गला खुला, ब्रा झलक रही।
12 बजे नॉक हुई। ज़ैब थे। गेस्ट रूम ले गई। चाय बनाई। बातें कीं। उन्हें लुभाने के लिए दुपट्टा उतारा। चाय के बर्तन उठाने बहाने झुकी, क्लिवेज दिखाया। वो समझ गए।
फिर मुझे पास बिठाया। एक ब्रेस्ट हल्के से दबाया। फिर दोनों हाथों से ब्रेस्ट ऊपर उठाए। निप्पल दबाए, पेट-हिप्स पर हाथ फेरा। मज़ा आने लगा। उनकी जींस पर उभार दिखा।
शर्ट-बनियान उतारी। नंगी छाती मेरी छातियों से सटी। मैंने उनके बदन पर हाथ फेरा। किसिंग शुरू। पैशनेट फ्रेंच किस। जीभ चूसते, होंठ हल्के काटते।
फिर मेरी कमीज़ उतारी। ब्रेस्ट के बीच किस। ब्रा खोली। नंगी छातियाँ। हाथों से मसलना शुरू। एक हाथ नीचे। मैंने आह भरी। दरवाज़ा लॉक किया।
एक पल ख़याल आया—ये क्या कर रही हूँ? शौहर को धोखा? लेकिन वो नशा इतना था कि डर भाग गया। निप्पल हार्ड। उन्होंने चूसा, जैसे दूध निकाल रहे हों। आग लगी।
जींस उतारी। अंडरवियर में बड़ा उभार। मेरी सलवार ऊपर से मसला। नाड़ा खोला। मैं नंगी। शर्म से जाँघें बंद। उन्होंने अंडरवियर उतारा। लंबा-मोटा लिंग मेरे पेट पर लटका। मैंने छुआ। उन्होंने हाथ पकड़कर रखा। मज़ा आया।
जाँघें खोलीं। मुँह नीचे। फुद्दी पर किस। लिकिंग। आह निकली। मैंने उनका सिर पकड़ा। उन्होंने मुझे झटका, जाँघें कंधों पर। धीरे से अंदर डाला। हाय… फिर अंदर-बाहर। आह… उह… येस… हाँ…
4 मिनट बाद अंदर डिस्चार्ज। मुस्कान। वो रात 5 बार। अलग-अलग स्टाइल—लेज़ शोल्डर पर, डॉगी, स्ट्रेट, हिप्स से। स्टैमिना कमाल।
उस रात के बाद शौहर के साथ भी पैशन बढ़ा। उन्होंने नोटिस किया, पूछा भी।
ज़ैब से हफ्ते में 1-2 बार। कभी उनके घर, कभी रात को मेरा। दो पति—एक शौहर, एक बॉयफ्रेंड। शॉपिंग, घूमना—बुर्के में।
फिर फैसला—एक और बच्चा। ख़याल आया—क्यों न ज़ैब का? प्यार की निशानी। उन्होंने हाँ की। ओव्यूलेशन के पहले दो दिन ज़ैब, बाकी शौहर।
उस दिन खूब सिंगार—गजरा, काजल, लिपस्टिक, शेव्ड, परफ्यूम, रेड सूट, रेड ब्रा। उनके घर 6 राउंड। घर लौटी, उल्टी हुई। प्रेग्नेंट। खुशी। अगले दिन शौहर को दिखाया—उनसे प्रेग्नेंट।
आज एक महीना हो गया। बहुत खुश हूँ। असली मज़ा लिया, संतुष्टि मिली। प्यार की वो आग आज भी जलती है।