रात के डेढ़ बजे एक रैंडम मैसेज ने कैसे दो अजनबियों को होटल के कमरे तक पहुंचा दिया? चंडीगढ़ में नौजवान कार्तिक और लुधियाना की हॉट रिया की पहली मुलाकात, पहली हग, पहला किस और पहली जोरदार चुदाई की पूरी सच्ची-सी कहानी। वर्जिन लड़की की टाइट चूत, चूसे हुए गुलाबी निप्पल्स, सिसकारियां और पांच घंटे की मस्ती – सब कुछ विस्तार से।
हाय दोस्तों, मैं कार्तिक, 22 साल का हूं। लुक्स में एवरेज हूं – न ज्यादा हैंडसम, न ज्यादा सादा – लेकिन दिल का बहुत शरारती। ये कहानी आज से ठीक एक साल पुरानी है, जब मैं चंडीगढ़ में नई-नई जॉब जॉइन करके आया था। सिटी नई थी, दोस्त कम थे, और रातें अकेली।
एक रात नींद बिल्कुल नहीं आ रही थी। बाहर तेज बारिश हो रही थी, खिड़की पर बूंदें टप-टप गिर रही थीं, हवा ठंडी और नम थी। मैं बिस्तर पर करवटें बदल रहा था, बॉडी गरम थी, मन बेचैन। फोन उठाया और रैंडमली एक नंबर डायल करके मैसेज भेज दिया – “हाय, नींद नहीं आ रही क्या?”
रात के करीब डेढ़ बज रहे थे। उम्मीद नहीं थी कि कोई रिप्लाई आएगा। लेकिन कुछ मिनट बाद ही फोन वाइब्रेट हुआ। “नहीं आ रही। तुम कौन?”
बस यहीं से शुरुआत हुई। नाम था उसका रिया। पहले तो सिर्फ हल्की-फुल्की बातें – मौसम कैसा है, जॉब कैसी चल रही, चंडीगढ़ कैसा लग रहा। लेकिन मेरी बातें उसे अच्छी लगने लगीं। मैं थोड़ा फ्लर्टी हूं, तो जल्दी ही मैंने “आई लव यू” लिख दिया। वो हंसकर इमोजी भेजकर टाल गई, लेकिन मैसेज करती रही।
धीरे-धीरे चैटिंग गहरी होती गई। डर्टी जोक्स शुरू हुए। वो भी बराबर से जवाब देती। कभी वो कोई जोक भेजती, कभी मैं। हंसते-हंसते इमोजी की बौछार होती। रात-रात भर बातें चलतीं। वो बताती कि उसे मेरी शरारतें बहुत पसंद हैं, कि मैं उसे हंसाता हूं, कि मेरी बातों में एक अलग ही मजा है। मैं उसे बताता कि वो कितनी स्मार्ट है, कितनी बोल्ड।
लगभग बीस दिन ऐसे ही बीते। हर रात चैट, कभी वॉइस मैसेज, कभी फोटोज। एक रात मैंने हिम्मत करके लिखा, “मिलोगी कभी?”
पहले तो उसने मना किया। “पागल हो गए हो? इतनी जल्दी? हम तो अभी एक-दूसरे को ठीक से जानते भी नहीं।”
लेकिन मुझे पता था – उसका मन भी था। बातों-बातों में उसने हां कर दी। वो लुधियाना में रहती थी, चंडीगढ़ से सिर्फ दो घंटे की दूरी। हमने प्लान बनाया। पहले ही साफ-साफ बात हो चुकी थी कि मिलते ही हम इंटीमेट होंगे। उसे कोई ऐतराज नहीं था। बल्कि वो खुद भी उतनी ही एक्साइटेड लग रही थी – मैसेज में लिखती, “बहुत नर्वस हूं, लेकिन एक्साइटेड भी।”
मैं पहले से तैयार था। रूममेट्स ने मजाक में कंडोम का पैकेट थमा दिया था, बोले “सेफ रहो भाई”। मैं बाइक लेकर बस स्टैंड पहुंचा। फेसबुक पर उसकी फोटो देखी थी, लेकिन रियल में वो… बाप रे! हूर से कम नहीं थी। स्किन-टाइट ब्लैक जींस जो उसके गोल-मटोल कूल्हों को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर गले तक खुला व्हाइट टॉप जिससे उसकी गहरी क्लीवेज झलक रही थी, बाल खुले और हवा में लहरा रहे, लाइट मेकअप लेकिन लिप्स पर ग्लॉसी रेड लिपस्टिक। उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े, चाल में आत्मविश्वास और थोड़ी शरारत।
मैंने दूर से आवाज दी, “हाय रिया!”
वो मुड़ी, थोड़ी शरमाई, आंखें नीची कर लीं, लेकिन मुस्कुरा भी दी। हमने दो मिनट वहीं बात की – नर्वस हंसी, हल्की छेड़छाड़। फिर वो बाइक पर पीछे बैठी। जैसे ही उसकी कमर पर हाथ रखा, उसकी गर्म बॉडी का एहसास हुआ, दिल तेज धड़कने लगा। उसकी खुशबू – हल्की परफ्यूम और बारिश की नमी – नाक में घुस रही थी।
थोड़ी देर शहर में घूमे। लंच किया, कॉफी पी। बातें करते रहे – पुरानी चैट्स याद करते, हंसते। फिर मैंने धीरे से पूछा, “होटल चलें?”
वो शरमाई, होंठ काटे, आंखें नीची करके बोली, “चलो… लेकिन ज्यादा शरारत मत करना।”
मैं उसका इशारा समझ गया। हम एक अच्छे होटल में गए। रूम लिया। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ और लॉक किया, मैंने उसका हाथ पकड़ा, लाइट्स ऑफ कीं और उसे अपनी ओर खींच लिया। टाइट हग किया। उसकी सॉफ्ट बॉडी मेरी बॉडी से पूरी तरह सटी थी – उसके बूब्स मेरे सीने पर दब रहे थे, उसकी सांसें तेज और गर्म मेरी गर्दन पर लग रही थीं। मैंने उसकी गर्दन पर होंठ रखे, धीरे-धीरे किस करना शुरू किया – हल्के चूम, फिर जीभ से चाटना। उसकी बॉडी सिहर रही थी।
ये मेरा पहला मौका था। उसका भी। शायद इसी वजह से वो अचानक घबरा गई। उसने मुझे हल्का धक्का दिया और बोली, “नहीं कार्तिक… मैं तैयार नहीं हूं। मुझे घर जाना है।”
मैं रुक गया। ट्यूब लाइट ऑन की। “क्या हुआ जान? डर गई? कोई बात नहीं, हम जैसे हो वैसे ही रहेंगे।”
वो बेड पर बैठ गई, आंखें नीची। “बस… अभी मन नहीं है। बहुत तेजी से हो रहा है सब।”
मैं मुस्कुराया। “ठीक है। कोई जबरदस्ती नहीं। हम बस बातें करेंगे, हग करेंगे।” मैंने उसे गोद में उठाया, बेड पर बिठाया और धीरे-धीरे उसके हाथ सहलाने लगा। उसके टॉप से क्लीवेज साफ दिख रहा था – गहरी, सॉफ्ट, और उसकी सांसों से ऊपर-नीचे हो रही। मैं पागल हो रहा था, लेकिन कंट्रोल रखा।
वो शरमाई, मुस्कुराई। मैंने हिम्मत करके उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे बाहों में भर लिया। अब वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी थी। हम टाइट हग कर रहे थे। मैंने बहाने से अपना सर उसके बूब्स पर टिका दिया। वो सिहर तो गई, लेकिन मना नहीं किया। मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया।
मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रखा, हल्के से दबाया। वो सिहर गई, मेरा हाथ हटाया और बोली, “शरारत मत करो।” लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी, सांसें तेज हो रही थीं। मैंने फिर कोशिश की। कई बार वो टालती रही, लेकिन अब उसकी बॉडी रिएक्ट कर रही थी।
आखिर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने उसकी गर्दन पर फिर किस किया, टॉप को ऊपर उठाया और लेफ्ट बूब बाहर निकाला। ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, फिर ब्रा का हुक खोला। उसके बूब्स बिल्कुल टाइट, गोल, 34 साइज के – सॉफ्ट लेकिन फर्म, निप्पल्स गुलाबी और पहले से ही हार्ड। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा – धीरे, फिर तेज। वो सिसकारी भरने लगी – “आह… उम्फ… कार्तिक… क्या कर रहे हो… आह्ह…”
दूसरे बूब को हाथ से मसल रहा था, निप्पल को उंगलियों से पिंच कर रहा था। वो अब पूरी तरह मस्त हो चुकी थी, कमर हिला रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी जींस की जिप पर ले गया। उसने रोका, लेकिन कमजोर आवाज में। मैंने फिर उसके बूब्स चूसे और उसे और गरम कर दिया। दूसरी बार हाथ उसकी पैंटी में पहुंचा। इस बार उसने नहीं रोका। उसकी चूत पहले से ही गीली थी – गरम, चिकनी। जैसे ही उंगली से क्लिट छुआ, वो कांप गई, कमर ऊपर उठा दी और जोर से सिसकारी – “आआह्ह… कार्तिक…”
मैंने जींस की बटन खोली और खींचकर उतार दी। अब वो सिर्फ ब्लैक लेस पैंटी में थी – जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी शर्ट-जींस उतारी और उसके ऊपर लेट गया। उसकी टांगें फैलाईं। उसकी चूत पर उंगली फेरते रहा – क्लिट को रगड़ता, अंदर उंगली डालता। वो आंखें बंद किए सिसकारियां भर रही थी – “उम्फ… आह… हां… ऐसे ही…”
फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला। वो 6.5 इंच का था, पूरी तरह खड़ा, नसें उभरी हुईं। मैंने कहा, “इसे हाथ में लो ना।”
वो शरमाई, “नहीं… शरम आ रही है।”
फिर मैंने पूछा, “अंदर डाल दूं?”
वो कुछ नहीं बोली, बस धीरे से सर हिलाया और मुस्कुराई, आंखें बंद कर लीं।
मैंने धीरे-धीरे पूरा अंदर किया। उसकी चूत बहुत टाइट थी – गरम, गीली, मुझे पूरी तरह जकड़ रही थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वो आहें भर रही थी – “आह… आह… कार्तिक… धीरे… आह्ह…”
आवाज बाहर न जाए इसलिए मैंने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया। थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हुआ और वो भी कमर हिलाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। वो भी ऑर्गेज्म तक पहुंच चुकी थी – उसकी चूत सिकुड़ रही थी, बॉडी कांप रही थी। मैं भी झड़ गया। हम पसीने से तर, एक-दूसरे की बाहों में लेटे रहे, सांसें तेज।
थोड़ी देर बाद मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने नया कंडोम लगाया। उसने कहा, “बस… अब नहीं। थक गई हूं।” लेकिन उसकी आंखें कुछ और कह रही थीं – शरारत और भूख। मैंने उसके बूब्स फिर चूसे, निप्पल्स काटे। वो फिर गरम हो गई, सिसकारियां भरने लगी।
इस बार मैंने उसका सर दीवार से सटा दिया, उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो जोर से चिल्लाई, “आआह्ह… धीरे-धीरे चोदो ना… बहुत दर्द हो रहा है…”
लेकिन उसकी कमर खुद ऊपर उठ रही थी, मुझे और गहराई दे रही थी। वो मुझे और जोर से चाह रही थी। मैंने स्पीड बढ़ा दी। जोर-जोर से धक्के मारने लगा – हर धक्के में आवाज हो रही थी। उसके बूब्स उछल रहे थे, मैं उन्हें मुंह से पकड़-पकड़ कर चूस रहा था। वो नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थी। “आह… और जोर से… हां… चोदो मुझे… आह्ह…”
फिर मैं झड़ गया। वो भी दूसरी बार जोर से झड़ी – उसकी चूत ने मुझे पूरी तरह निचोड़ लिया।
हमने करीब पांच घंटे साथ बिताए। बहुत इंजॉय किया – हग किया, किस किया, बातें की। फिर मैंने उसे बस स्टैंड छोड़ा। जाते वक्त वो मुस्कुराई, मेरे गाल पर किस किया और बोली, “अगली बार फिर मिलेंगे। बहुत मजा आया।”