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गाँव की झोंपड़ी में देसी भाभी की जबरदस्त चुदाई - खेत में भाभी को चोदा
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HOT Free XXX Hindi Kahani

Khet Me Desi Bhabhi Ko Choda – Gaon Ki Jhopdi Me Bhabhi Ki Zabardast Chudai | Hindi Sex Story

गाँव के खेत में लाल साड़ी वाली सेक्सी भाभी को देवर ने झोंपड़ी में ले जाकर खूब चोदा। टाइट चूचियाँ दबाईं, गीली चूत में मोटा लंड पेला और एक घंटे तक जमकर चुदाई की। भाभी की सिसकारियाँ और चूत का रस सब कुछ इस हॉट देसी कहानी में। पूरी कहानी पढ़ो और अपनी चूत-लंड को गरम करो!


नमस्ते मेरी प्यारी भाभियों, और उन सभी सेक्सी आंटियों को जो मेरी कहानियाँ पढ़कर अपनी चूत को सहलाती हैं। मैं देवदास अपनी तीसरी कहानी लिख रहा हूँ। उम्मीद है कि मेरी दूसरी कहानी “मस्त भाभी की गुलाबी चूत चोदा सेल्समैन बनकर” को जिस तरह का प्यार और रिस्पॉन्स मिला, और कई भाभियों ने मुझे मेल करके अपनी-अपनी इच्छाएँ बताईं, ठीक वैसा ही प्यार इस कहानी को भी मिलेगा। जो भी भाभी मुझे मेल करेगी, उसकी हर फैंटसी को पूरा करने की पूरी कोशिश करूँगा—ये मेरा वादा है।

ये कहानी मेरी पड़ोसन भाभी की है, जिसे मैं पहले भी कई बार मौका पाकर खूब चोदा हूँ। उसकी पहली चुदाई की कहानी मैंने अपनी पहली स्टोरी “भाभी की टाइट चूचियाँ” में विस्तार से बताई थी। लेकिन इस बार मैंने उसे अपने खेत में, एक छोटी-सी झोंपड़ी में जमकर चोदा। उस चुदाई का मज़ा इतना जबरदस्त था कि आज भी जब याद करता हूँ तो मेरा लंड तनकर बांस बन जाता है। मुझे पूरा यकीन है कि ये कहानी पढ़कर हर मर्द अपनी बीवी को चोदने के लिए बेताब हो जाएगा या फिर मुठ्ठ मारकर शांत हो जाएगा। और मेरी प्यारी भाभियाँ और आंटियाँ—to आप तो पढ़ते-पढ़ते अपनी चूत में उँगलियाँ डालने लगेंगी, या फिर मेरे मोटे लंड को याद करके बैंगन का सहारा लेंगी। बैंगन वाली भाभियों से बस एक ही गुजारिश है—बैंगन छोड़ दो, मुझे मेल करो। मैं तुम्हारी चूत की सारी खुजली मिटाने की पूरी कोशिश करूँगा।

अब असली कहानी शुरू करता हूँ…

भाभी अपने मायके गई हुई थीं। बच्चों के एग्जाम की वजह से कोई उनके साथ नहीं गया था, और मेरे लिए ये सबसे बढ़िया खबर थी। दो दिन बाद भाभी का फोन आया। उनकी आवाज में एक अलग सी शरारत थी। “सुनो, गाँव में मेला लगने वाला है। अगर घूमने का मन हो तो चले आओ…” मेला तो बस बहाना था, असल में मैं भाभी से मिलने बेताब था। अगले ही दिन मैं ट्रेन पकड़कर उनके गाँव पहुँच गया। दोपहर के करीब बारह बजे मैं उनके घर पहुँचा।

भाभी मुझे देखते ही मुस्कुराईं। उनकी आँखों में वही पुरानी आग थी। घरवाले भी मुझे बहुत प्यार करते हैं, सबने खूब खातिरदारी की। मैंने हाथ-मुँह धोया, कपड़े बदले और आराम करने लगा। तभी भाभी मेरे कमरे में आईं। मैंने मौका देखकर उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया। उनकी टाइट चूचियाँ मेरे सीने से दब गईं। मैंने साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूचियों को सहलाना शुरू किया। वो हल्के से सिसकारियाँ लेने लगीं। मेरा हाथ धीरे-धीरे नीचे सरका और उनकी चूत पर पहुँचा। वो पूरी गर्म हो चुकी थीं। लेकिन अभी वो तैयार नहीं थीं। मुस्कुराते हुए बोलीं, “अरे पागल, अभी नहीं… सब घर में हैं। शाम को देख लेंगे।” और शरमाते हुए निकल गईं।

दोपहर का खाना खाकर मैं सो गया। जब आँख खुली तो सामने का नजारा देखकर दिल धड़क गया। भाभी लाल रंग की रेशमी साड़ी में दुल्हन की तरह सजी हुईं मेरे पास खhe’s खड़ी थीं। लाल ब्लाउज, मंगलसूत्र, बिंदी—वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। मैंने सोचा, सपना तो नहीं? वो हँसते हुए बोलीं, “उठो ना, मेला घूमने जाना है…” कहते हुए उन्होंने मेरे लंड को हल्के से दबा दिया। मैं चिहुँक उठा और उन्हें पकड़ते हुए बोला, “भाभी, कसम से आज तुम कयामत लग रही हो। प्लीज, अभी एक बार…” वो शरमाकर भाग गईं, लेकिन उनकी आँखों में साफ-साफ लिखा था कि वो भी उतनी ही बेताब हैं जितना मैं।

मैं तैयार होकर उनके साथ निकला। रास्ते में गाँव की कई लड़कियाँ मिलीं, भाभी ने मुझे सबको अपना पति बता दिया। हम खेतों के रास्ते मेला जा रहे थे। थोड़ी दूर चलते-चलते मैं थक गया। मैंने कहा, “भाभी, थोड़ी देर कहीं बैठ जाएँ?” वो मुस्कुराईं और बोलीं, “चलो, सामने हमारा खेत है। वहाँ एक झोंपड़ी है, पिताजी रात में वहाँ सोते हैं। वहीं बैठते हैं।”

हम झोंपड़ी में पहुँचे। अंदर एक पुराना खाट बिछा था। मैं तुरंत उस पर बैठ गया। भाभी मेरे पास आकर बैठ गईं। चारों तरफ सिर्फ खेत थे, हवा में सरसों की खुशबू, और दूर-दूर तक कोई नहीं। मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रखा। वो मेरी तरफ मुड़ीं और आँखों ही आँखों में कुछ कह गईं। मैंने उनके कंधे पर किस किया। फिर गले पर। वो सिहर उठीं। मैंने धीरे-धीरे उनकी पीठ पर हाथ फेरना शुरू किया। वो मेरे और करीब सरक आईं। मैंने उनके कानों में फुसफुसाया, “भाभी, मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी…” वो शरमाते हुए बोलीं, “मुझे भी… बहुत दिन हो गए ना…”

मैंने उनका पल्लू सरकाया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। उनकी काली ब्रा में वो टाइट चूचियाँ किसी जादू की तरह लग रही थीं। मैंने ब्रा भी उतार दी। उनकी गुलाबी निप्पल्स तने हुए थे। मैंने उन्हें मुँह में लिया, चूसा, चबाया। भाभी की सिसकारियाँ तेज हो गईं। वो मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थीं और बार-बार बोले जा रही थीं, “देव… और जोर से… हाँ वैसे ही…” मैंने उनकी साड़ी ऊपर उठाई। अंदर कुछ नहीं पहना था। उनकी गुलाबी, चिकनी चूत बिल्कुल साफ और गीली हो चुकी थी। मैंने एक उंगली अंदर डाली। वो तड़प उठीं। दो उँगलियाँ कीं तो वो झड़ गईं। उनकी चूत से गर्म रस मेरे हाथ पर बहने लगा।

अब मुझसे भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने अपने सारे कपड़े उतार फेंके। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था। भाभी ने उसे देखकर आँखें बड़ी कर लीं और प्यार से सहलाते हुए बोलीं, “इसे इतना मिस किया है मैंने…” मैंने उन्हें खाट पर लिटाया, उनकी टांगें फैलाईं और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। वो बेताब होकर बोलीं, “देव… अब डालो ना… कितना तड़पाओगे?” मैंने हल्का सा धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। वो चिहुँककर बोलीं, “ओह्ह्ह… देव… कितना मोटा है… धीरे…” मैंने दूसरा धक्का मारा और पूरा लंड अंदर तक घुस गया। उनकी चूत इतनी टाइट और गर्म थी कि लग रहा था स्वर्ग में हूँ।

मैंने धीरे-धीरे झटके देने शुरू किए। वो अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थीं। उनकी सिसकारियाँ, उनकी चुदाई की आवाजें, हवा में सरसों की खुशबू—सब कुछ मिलकर एक अलग ही नशा बना रहा था। वो बार-बार बोले जा रही थीं, “और जोर से… हाँ… आज पूरी तरह मुझे अपना बना लो… मेरी चूत का सारा रस निकाल दो…” मैंने स्पीड बढ़ाई। वो अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा रही थीं। करीब एक घंटे तक हम दोनों ने एक-दूसरे को खूब प्यार किया। आखिर में हम दोनों एक साथ झड़े। मैंने उनका पूरा रस अपनी लंड पर महसूस किया और वो मेरी गर्म वीर्य को अपनी चूत में लेती रहीं।

झड़ने के बाद हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर लेटे रहे। उनकी साँसें मेरे सीने पर लग रही थीं। जब अंधेरा होने लगा तो हमने कपड़े पहने। मेला छोड़कर हम सीधे घर लौट आए। उस रात भी मैंने उन्हें तीन बार चोदा—हर बार वो और ज्यादा बेताब थीं। लेकिन वो कहानी फिर कभी।
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ये हिंदी सेक्स कहानी आप HotSexStoriesPictures.Com पर पढ़ रहें हैं|

मुझे पता है कि अब तक कई भाभियों की चूत गीली हो चुकी होगी। उनकी प्यास बढ़ गई होगी। अफसोस कि मैं अभी आपके पास नहीं हूँ। लेकिन मेरे लंड की कसम—कोई दूसरी चीज अपनी चूत में मत डालना। मुझे मेल करो। मैं कोशिश करूँगा कि तुम्हारी हर प्यास बुझा सकूँ। और हाँ, मेरी बेंगलुरु वाली भाभी—if you’re reading this, please एक बार फिर मेल करना। मैं तुम्हें अपना लंड जरूर दूँगा, और ग्रुप सेक्स की तुम्हारी ख्वाहिश भी पूरी करूँगा। अपने दोस्तों को भी साथ लाऊँगा जिनका लंड मुझसे भी मोटा है।

तो मेरी खूबसूरत चूत वालियों, जल्दी मेल करो। तुम्हारा देवदास इंतजार कर रहा है।


लाल साड़ी में सजी भाभी खेतों के बीच,
झोंपड़ी में देवर ने खोला चुदाई का रंग।
टाइट चूचियाँ दबीं, चूत में लंड घुसा जोर से,
सिसकारियाँ गूँजीं, रस बरसा दोनों तरफ भरपूर।

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