नई-नवेली दुल्हन मीना की जवानी की आग पहले पति राहुल के 7 इंच के लंड से बुझती है, लेकिन जब राहुल 10 दिन के लिए बाहर जाते हैं तो मीना की भूखी चूत देवर विक्की के मोटे लंड की शरण में जाती है। किचन में, बेडरूम में, रातों में भरपूर चुदाई की ये गर्मागर्म देसी कहानी आपको अंत तक गरम रखेगी।
हेलो दोस्तों, मेरा नाम मीना है। मैं दिल्ली की रहने वाली हूँ। उम्र 22 साल, जवानी अपनी पूरी चमक पर है और मेरा जिस्म ऐसा कमसिन कि कोई भी देखे तो नजरें हटा न पाए। फिगर 35-29-36, हाइट 5’6″, रंग सांवला, लेकिन इतना आकर्षक कि लोग मुझे घूरते रहते हैं और अपने लंड पर हाथ फेरने लगते हैं।
शादी से पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था। सहेलियाँ अक्सर अपनी-अपनी कहानियाँ सुनाती थीं, लेकिन मेरा मन कभी नहीं डोला। फिर शादी हुई और मेरे पति राहुल ने मुझे पहली बार चोदा… बस उसी दिन से सेक्स मेरी जिंदगी बन गया। अब बिना चुदाई के एक पल भी रहना मुश्किल लगता है। कोई जरा सा भी छू ले तो चूत में आग लग जाती है।
शादी एक ऐसे घर में हुई जहाँ सास-ससुर नहीं थे। सिर्फ मेरे पति राहुल (25 साल), सबसे बड़े भाई और प्रॉपर्टी डीलर। उनके बाद विक्की (23 साल), जो राहुल के साथ बिजनेस संभालता है। राजू (21 साल) विदेश में पढ़ाई कर रहा है और सबसे छोटा मोंटी (18 साल) अभी +2 में है। शादी के बाद मैं राहुल से जी भरकर चुदाई करवाती थी। उनका 7 इंच का लंड कमाल का था – मोटा, सख्त, और हर बार मुझे जन्नत की सैर करवाता।
एक दिन की बात है। सुबह मोंटी स्कूल चला गया, राहुल और विक्की ऑफिस। दोपहर में राहुल रोज की तरह घर खाना खाने आते थे। उस दिन मैंने लाइट ग्रीन साड़ी पहनी थी – पतली, बॉडी को हग करने वाली।
ब्लाउज टाइट, कमर से नीचे साड़ी लो-वेस्ट में लपेटी हुई थी ताकि नाभि झलकती रहे। मैं किचन में खाना बना रही थी जब राहुल आए। दरवाजे पर ही मुझे देखा और उनकी आँखों में वही भूख जग गई।
मैं शरमाई, मुस्कुराई और पीछे मुड़ी। उनकी आँखों में देखकर बोली, “निमंत्रण नहीं, सीधे बुलावा है जानू। आओ ना, अपनी मीना को बुझा दो।”
राहुल की साँसें तेज हो गईं। उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया, होंठों पर होंठ रख दिए। किस इतना गहरा कि मैंने स्टोव बंद कर दिया और उनके गले लग गई। उनके हाथ मेरी कमर से ऊपर सरकते हुए ब्रेस्ट पर पहुँचे, ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगे। मैंने भी उनका शर्ट खींचा, सीने पर नाखून फेरे। हम दोनों की साँसें मिल रही थीं, बदन जल रहा था।
राहुल ने मेरा पल्लू सरकाया, ब्लाउज के बटन खोले और मेरे भरे-पूरे स्तन बाहर निकाल लिए। ब्रा नहीं पहनी थी मैंने – जानबूझकर। वे झुककर चूसने लगे, एक को मुँह में लेकर दूसरा हाथ से मसलने लगे। मैंने उनका सिर पकड़ लिया और कराह उठी, “आह्ह… राहुल… और जोर से… मुझे तुम्हारी हो जाने दो।”
वे मुझे गोद में उठाकर बेडरूम ले गए। रास्ते में ही साड़ी खोल दी, पेटीकोट उतार दिया। मैं पूरी नंगी उनके सामने थी। उन्होंने भी कपड़े उतारे – उनका 7 इंच का लंड तना हुआ, लाल टोपे वाला, रगों से भरा हुआ। मैं बिस्तर पर घुटनों के बल बैठ गई, लंड हाथ में लिया और गेंदों को मुँह में लेकर चूसने लगी। राहुल की सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं, “आह्ह मीना… कितना अच्छा लगता है जब तुम ऐसे प्यार करती हो…”
फिर मैंने टोपी पर जीभ फेरी, पूरा लंड मुँह में लिया और चूसने लगी – गहराई तक, तेज-तेज। उनका प्री-कम निकलने लगा, स्वाद मेरे गले तक पहुँच रहा था। राहुल बेकाबू हो गए। उन्होंने मुझे लिटाया, टाँगें चौड़ी कीं और अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। मैं तड़प उठी, “राहुल… प्लीज… अब डाल दो… मुझे तुम्हारी जरूरत है…”
वे मुस्कुराए, “इतनी जल्दी? थोड़ा और तड़पाऊँ अपनी जान को?”
मैंने उनकी कमर पकड़ी और खुद नीचे सरक गई। उन्होंने एक जोरदार धक्का मारा – पूरा लंड अंदर। मैं चीखी, लेकिन खुशी की चीख। फिर शुरू हुई असली चुदाई। मैं कमर उचकाकर उनका साथ दे रही थी, वे मेरे स्तनों को मसलते, होंठ चूसते, जोर-जोर से धक्के मारते। 15 मिनट तक हम दोनों पसीने में तर, एक-दूसरे में समाते रहे। आखिर में राहुल ने लंड निकाला और मेरे स्तनों पर अपना गरम वीर्य छोड़ दिया। मैंने उँगलियों से उठाकर चाट लिया – उनका स्वाद, उनकी खुशबू।
फिर दिन ऐसे ही बीतते रहे। लेकिन एक दिन राहुल ने कहा कि उन्हें हिमाचल 10 दिन के लिए जाना पड़ेगा – जमीन के सिलसिले में। मुझे बुरा लगा। बोली, “विक्की को भेज दो ना, तुम यहीं रहो मेरे पास।”
वे हँसे, “नहीं जान, मुझे ही जाना पड़ेगा। लेकिन चिंता मत करो, कुछ चाहिए हो तो विक्की से ले लेना। वो तुम्हारा पूरा खयाल रखेगा।”
उनके जाने के बाद मैं अकेली रह गई। रात में नींद नहीं आ रही थी। चूत में खुजली, बदन में आग। मैंने नाइटी उतारी, पूरी नंगी हो गई और बिस्तर पर लेटकर खुद को सहलाने लगी। पहले स्तन, फिर नीचे… दो उंगलियाँ अंदर, फिर चार। लेकिन लंड जैसा मजा कहाँ? खयाल विक्की का आने लगा – उसका जवान बदन, उसकी मुस्कान। मैं और तेज हो गई, और झड़ गई। लेकिन राहत अस्थायी थी।
राहुल की बात याद आई – “कुछ चाहिए हो तो विक्की से ले लेना।”
मैंने फैसला कर लिया। 10 दिन विक्की से ही अपनी प्यास बुझाऊँगी। देवर आधा घरवाला जो होता है।
अगले दिन मैंने प्लान बनाया। हल्की सी पिंक नाइटी पहनी – बिना ब्रा-पैंटी। गले गहरा, पीठ खुली हुई। शाम को जब सब सोने चले गए, मैं विक्की के कमरे में गई। दरवाजा खुला था। वो बिस्तर पर लेटा मोबाइल चला रहा था। मुझे देखकर उठ बैठा।
“भाभी… कुछ चाहिए?”
मैं अंदर आई, दरवाजा बंद किया और उसके पास बैठ गई। बोली, “हाँ विक्की… बहुत कुछ चाहिए। राहुल भैया ने कहा था ना, तुम मेरा खयाल रखोगे।”
उसकी आँखें मेरे बदन पर घूमने लगीं। मैंने उसका हाथ लिया और अपने गाल पर रखा। “मुझे अकेलापन महसूस हो रहा है विक्की… तुम मेरे साथ रहोगे ना?”
उसने हल्के से दबाया। मैंने उसका सिर खींचकर अपने होंठों पर रख दिया। किस शुरू हुआ – पहले धीरे, फिर भूखा। मैंने उसकी टी-शर्ट उतारी, उसने मेरी नाइटी। हम दोनों नंगे। उसका लंड भी 7 इंच का, जवान और सख्त। मैंने उसे चूसा, वो मेरे स्तनों को। फिर मैं लेट गई, टाँगें फैलाईं और बोली, “विक्की… आ जाओ… अपनी भाभी को अपना बना लो।”
उसने झिझका नहीं। लंड मेरी चूत पर रगड़ा, फिर अंदर। मैंने कमर उठाकर स्वागत किया। चुदाई शुरू हुई – जोरदार, लंबी, दोनों की सिसकारियों से कमरा भर गया। वो मुझे अलग-अलग पोजीशन में चोदता रहा – ऊपर मैं, फिर डॉगी, फिर मिशनरी। आखिर में उसने भी मेरे स्तनों पर अपना वीर्य छोड़ा और मैंने चाट लिया।
उसके बाद 10 दिन तक हर रात विक्की मेरे कमरे में आता। कभी किचन में, कभी सोफे पर – हमने खूब चुदाई की। राहुल जब वापस आए तो मैंने सब सामान्य रखा, लेकिन अब मेरे पास दो मर्द थे जो मेरी प्यास बुझाते थे।
दोस्तों, कैसी लगी मेरी कहानी? अगर अच्छी लगी तो बताइए। आपकी प्यारी मीना।