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साली चंचल की कुंवारी चूत की सील तोड़ी और बच्चा दिया
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Saali Ki Kunvari Choot Ki Seal Todi Aur Baccha Diya

संजू की सच्ची आपबीती – भाई की खूबसूरत साली चंचल की उदासी को दूर करते हुए उसकी कुंवारी चूत की सील तोड़ी। पहली बार लंड का मज़ा, चूत चाटकर पागल किया, जोर-जोर से चोदा और बच्चेदानी में वीर्य डालकर गर्भवती कर दिया। हॉट देसी चुदाई की पूरी कहानी जो आपको भी गरम कर देगी।

मैं संजू एक बार फिर आप लोगों के सामने अपनी आपबीती लेकर आ गया हूँ। सबसे पहले सभी चूत वालियों और लंड वालों को मेरा नमस्कार। मेरे बारे में आप जानते ही हैं – मैं 38 साल का शादीशुदा मर्द हूँ और अब तक करीब 50 से ज्यादा चूतें चोद चुका हूँ (रेगुलर वाली गिनती अलग है)। ये वाकया बिल्कुल ताज़ा है और मैं चाहता हूँ कि इसे पढ़कर आप भी अपनी चूत और लंड का पानी रगड़-रगड़ कर निकालें।

पिछले महीने ऑफिस के काम से मैं दिल्ली गया था। वहाँ मेरे रिश्ते के बड़े भैया रहते हैं, मैं उनके घर ही रुका। काम तो दो-तीन दिन का था, लेकिन मेरी रिटर्न फ्लाइट दो दिन बाद की थी। काम एक ही दिन में निपट गया, तो अगले दिन मैं फ्री था। 

भैया-भाभी दोनों जॉब पर चले गए थे। मैं अपने रूम में कुछ पढ़ रहा था कि अचानक डोरबेल बजी। सोचा कोई कोरियर होगा। दरवाज़ा खोला तो सामने भाभी की सबसे छोटी बहन चंचल खड़ी थी।

मुझे देखकर वो चौंकी, फिर पहचान गई। मैंने बताया कि दीदी और जीजा घर पर नहीं हैं, शाम को आएँगे। उसे अंदर आने को कहा, सोफे पर बिठाया, पानी-चाय दी और खुद उसके सामने बैठ गया। उसका चेहरा उदास था, आँखें नम। 

चंचल करीब 27 साल की है – भाभी से कहीं ज्यादा सुंदर, बॉडी एकदम मस्त। 34-28-34 का फिगर, 5’3″ हाइट, पेट बिल्कुल फ्लैट, चूतड़ गोल-गोल उभरे हुए, चुचियाँ सुदौल और कसी हुईं, कमर पतली। कुल मिलाकर स्वर्ग की अप्सरा लगती थी। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चंचल? इतनी उदास क्यों लग रही हो?” पहले तो वो चुप रही, फिर बोली, “दीदी कब आएँगी?” मैंने कहा, “शाम छह बजे।” फिर पूछा, “कोई ज़रूरी काम था?” वो कुछ देर सोचती रही, फिर खुल गई। उसका पति तलाक देना चाहता है। 

सास ने बच्चा न होने की वजह से झगड़ा करके उसे मायके भेज दिया और तलाक का नोटिस भिजवा दिया। असल में कमी उसके पति में है – वो कर ही नहीं पाता। लेकिन घरवाले मानने को तैयार नहीं। वो हर वक्त तलाक की टेंशन और अंदर की सेक्स की आग से जल रही थी।

मैंने धीरे से पूछा, “तेरी असली प्रॉब्लम क्या है?” वो बोली, “बच्चा नहीं हो रहा, इसलिए तलाक दे रहे हैं।” मैंने कहा, “डॉक्टर को दिखाओ ना।” वो शर्मा कर बोली, “मुझमें कोई कमी नहीं है संजू जी। बच्चा तो उंगली से थोड़े न होगा?” मैं समझ गया। फिर बोली, “वो चाहते हैं तो होता ही नहीं।” 

मैंने कहा, “तो तलाक लेकर दूसरी शादी कर लो।” वो बोली, “पापा की औकात नहीं दूसरी शादी कराने की, और मुझे उनसे बदला भी लेना है। जानबूझकर एक कुंवारी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद की है। लेकिन बिना बच्चे के वो मुझे वापस नहीं लेंगे।”

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ये सुनकर वो रोने लगी। बोली, “मेरी तकदीर ही खराब है संजू जी, कोई रास्ता नहीं दिख रहा। आखिर में ज़हर खाकर जान दे दूँगी।” मैं उठा, उसके पास गया। उसके सिर पर हाथ फेरा, गालों से आँसू पोंछे। उफ्फ… कितने मुलायम गाल थे। 

मैं यूँ ही सहलाते-सहलाते उसे अपनी तरफ खींच लिया। फिर खड़ा किया और बोला, “परेशान मत हो, कोई न कोई रास्ता निकल आएगा।”

उसे दिलासा देने के लिए मैंने उसे बाँहों में ले लिया। वो भी भावुक होकर और ज़ोर से लिपट गई। मेरे हाथ उसकी पीठ पर, फिर चूतड़ों पर फिसलने लगे। नरम-नरम उभरे हुए चूतड़… और उसकी सख्त चुचियाँ मेरे सीने में दबने लगीं। मैंने उसके माथे पर किस किया। 

वो और कसकर लिपट गई और कान में बोली, “संजू जी, एक बात कहूँ?” 

मैंने कहा, “बोलो।” 

वो बोली, “आज मुझे सच में आपकी ज़रूरत है। मेरी मुसीबत का एक ही रास्ता दिख रहा है – आप मुझे बच्चा दे दो।”

मैं चौंका, “ये क्या कह रही हो? तुम मेरे भाई की साली लगती हो।” वो बोली, “हिम्मत करके इतनी बड़ी बात आपसे कह दी। जीजा जी तो दीदी को भी माँ नहीं बना पाए। तुम्हारे दो बच्चे हैं… बस एक मुझे भी दे दो। अगर तुमने मना किया तो मैं किसी बाहर वाले से कर लूँगी, बदनामी होगी। मेरी ज़िंदगी का सवाल है संजू जी।”

वो फिर रोने लगी। मैंने उसे चुप कराने के लिए ज़ोर से लिपटा लिया, पीठ सहलाई, माथा चूमा। और यहीं से सब शुरू हो गया। वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगी – मुँह पर, गालों पर। उसके लाल, रसीले होंठ देखकर मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। पहले नरम-नरम किस, फिर चूसने लगा। 

वो आँखें बंद कर लीं। लंबा किस चला, दोनों की साँसें तेज़ हो गईं। जब होंठ छोड़े तो उसके होंठ और लाल हो गए थे। वो कसकर लिपटकर मेरे सीने में सिर छुपा लिया।

गरम किस से मेरा लंड खड़ा हो गया। वो मेरी पीठ सहलाते हुए दूसरा हाथ आगे लाई और लंड पर रख दिया। लुंगी के अंदर हाथ डालकर लंड बाहर निकाला। मेरा मोटा, तगड़ा लंड देखकर उसकी आँखों में चमक आ गई। 

“ओह माँ… इतना लंबा… इतना मोटा… कितना सख्त है!” उसने दोनों हाथों से पकड़ा और अचानक झुककर लंड चूम लिया। लंड फनफना उठा। वो कान में बोली, “संजू जी, अब मत तड़पाओ… जल्दी आ जाओ, बर्दाश्त नहीं हो रहा।”

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मैं भी पूरा गरम था। उसे भैया-भाभी के बेडरूम में ले गया। पहले साड़ी उतारी, फिर ब्लाउज़। ब्रा खोलते ही वो शर्मा गई, चुचियों पर हाथ रख लिया। मैंने धीरे से हाथ हटाया, चुचियों को चूमा, हथेली से दबाया। 

वो सिसकारी, “इश्ह…” मैंने निप्पल जीभ से चाटा, फिर मुँह में लिया और धीरे-धीरे चूसने लगा। वाह… क्या मस्त चुचियाँ थीं! लगता था उसके निकम्मे पति ने कभी इनका प्यार नहीं किया। 

थोड़ी देर चूसते ही उसकी शर्म भाग गई। वो ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियाँ लेने लगी, “संजू जी जल्दी कीजिए… आज लग रहा है मैं औरत बन जाऊँगी… उफ्फ आपने मेरे अंदर आग लगा दी है… मैं मर जाऊँगी!”

उसकी आँखें मस्ती से लाल हो गई थीं। उसने मेरा हाथ पकड़कर पेटीकोट के ऊपर से चूत पर रख दिया। मैंने नाड़ा खोला, पेटीकोट नीचे खींचा। वो शर्म से पलट गई। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसे आगे झुकाया। उसकी फूली हुई, गदराई गोरी चूत पीछे की तरफ उभर आई। 

चूत के गुलाबी होंठों से रस की बूँदें टपक रही थीं। एक भी बाल नहीं – एकदम साफ, गोरी-गोरी चूत। मैंने चूत पर किस किया तो वो सीधी हो गई।

मैं घुटनों के बल बैठ गया। टाँगें फैलाईं और चूत का दाना चूसने लगा। दाना धीरे-धीरे सख्त होकर बाहर निकला। मैंने होंठों के बीच लिया, चूसते हुए बाहर खींचा और छोड़ा – कई बार। उसकी चूत से रस का झरना बहने लगा। 

वो चूतड़ मेरे मुँह पर दबाकर कराह रही थी, “आह्ह… ओह्ह… संजू जी… ये क्या कर दिया… पहली बार मेरी चूत की प्यास महसूस हो रही है… मैं मर जाऊँगी इस आनंद से… और… और…”

मैंने उसके चूतड़ दोनों हाथों से पकड़े और रस भरी चूत को पागलों की तरह चाटने लगा। उसकी चूत की प्यारी-प्यारी खुशबू मेरे दिमाग में चढ़ गई। मैं दीवाना होकर चूत और आसपास के हिस्से को चूमने-चाटने लगा। बीच-बीच में जीभ निकालकर रानों को भी चाटता। 

वो मस्ती से भरकर बोली, “हाय राजा… जीभ से चाटो ना… अब मत तड़पाओ… मेरी चूत को चाटो… जीभ अंदर डाल दो… जीभ से चोदो!”

उसकी नशीली चूत की खुशबू ने मुझे पूरी तरह पागल बना दिया। मैंने उसे बेड पर बिठाया, खुद ज़मीन पर। उसकी जाँघें फैलाईं, कंधों पर रखीं और जीभ से चूत के होंठ चाटने लगा। वो मस्ती से बड़बड़ाने लगी और चूतड़ आगे खिसकाकर चूत मेरे मुँह से सटा दी। 

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उसके चूतड़ हवा में लटक रहे थे। मैंने जीभ पूरी की पूरी चूत में ठेल दी और अंदर की लाल दीवारों को सहलाने लगा। वो तिलमिला उठी, चूतड़ उचकाकर मेरी जीभ पर चूत दबाने लगी।

“हाय संजू जी… क्या मज़ा आ रहा है… अब जीभ अंदर-बाहर करो… चोदो राजा… जीभ से चोदो मुझे… तुम ही मेरे असली सैयां हो… पहले क्यों नहीं मिले… अब सारी कसर निकालूँगी… दो साल से तड़प रही हूँ… चोदो मेरी चूत को!”

मुझे भी जोश चढ़ आया। मैंने तेज़ी से जीभ अंदर-बाहर करने लगा। वो नीचे से कंबर उचकाकर मुझे चोद रही थी। मैंने जीभ कड़ी करके स्थिर कर ली और सिर आगे-पीछे करके चोदने लगा। उसका मज़ा दोगुना हो गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “और जोर से संजू जी… आज मैं तुम्हारी हो गई… ज़िंदगी भर तुमसे चुदवाऊँगी… आज मुझे गर्भवती कर दो!”

वो झड़ने वाली थी। ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाते हुए चूत मेरे चेहरे पर रगड़ने लगी। मैं पूरी तेज़ी से जीभ लपलपाकर चाट रहा था। जब जीभ उसकी बच्चेदानी से टकराई तो उसका बाँध टूट गया। उसने जाँघों में मुझे जकड़ लिया, चूत मेरे मुँह से चिपका दी। चूत का पानी पिचकारी मारकर निकला – दो-तीन बार – मेरे चेहरे पर बहने लगा। मैंने चूत के दोनों होंठ मुँह में दबाकर उसका अमृत पीने लगा। ये उसकी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था।

चूत चाटने से वो पूरी पागल हो गई। मेरे सिर के बाल पकड़कर मुझे ऊपर खींच लिया। अब मैंने उसे बेड पर लिटाया – चूतड़ बाहर की तरफ, पैर लटकते हुए। उसके पैर अपनी कमर पर उठाए और लंड को चूत के सूराख पर रगड़ा। 

चूत एकदम कुंवारी लग रही थी – गुलाबी होंठ चिपके हुए, छेद टाइट। सुपारा चूत पर रखा तो उसका बदन काँपने लगा। बोली, “जल्दी घुसाओ संजू जी… अब रहा नहीं जा रहा… अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं।”

मैंने कहा, “तेरी चूत बहुत टाइट है, थोड़ा दर्द होगा… सहन करोगी?” वो बोली, “डाल दो… दर्द की परवाह मत करो… आज पहली बार इतनी चुदास महसूस कर रही हूँ।” मैं खुश हो गया। चूत पहले से गीली थी, फिर भी थूक लगाकर लंड पर मला और धक्का मारा। सुपारा अंदर गया। वो चीखी, “आह्ह… धीरे… कितना मोटा है… चीर गई…”

मैं उसके ऊपर लेट गया, होंठ चूसने लगा। एक मिनट बाद तेज़ धक्का मारा – आधा से ज्यादा लंड अंदर। वो ज़ोर से चीखी, “हाय मर गई… बहुत दर्द… निकालो!” लेकिन मैंने पैरों में कैंची डाल रखी थी। फिर किस करके पूछा, “थोड़ा और है बस।” वो बोली, “पहली बार है ना इसलिए धीरे…” मुझे सरप्राइज़ हुआ। 

वो बोली, “संजू जी, मैं आज तक कुंवारी हूँ। उनका कभी खड़ा होता ही नहीं था। थोड़ा-बहुत हुआ भी तो बाहर ही झड़ जाता था।”

मेरा दिल बल्लियों उछल पड़ा – आज एक शादीशुदा लेकिन कुंवारी चूत की सील टूटने वाली है। लंड अंदर नहीं जा रहा था – सील मोटी हो गई थी। मैंने किस और बातों में उलझाकर मौका देखा और पूरी ताकत से आखिरी धक्का मारा। 

लंड उसकी कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर, बच्चेदानी तक पहुँच गया। वो तड़पी, आँखें बाहर, ज़ोर की चीख – “आईईईई… माँ… मर गईईई!” मुझे धकेलने की कोशिश की लेकिन मैंने कसकर पकड़ रखा था।

वो दर्द से रोने लगी। मैंने चेहरा चूमा, चुचियाँ चूसीं, चूतड़ सहलाए। पाँच मिनट बाद दर्द कम हुआ। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। धीरे-धीरे उसे भी मज़ा आने लगा। 
बोली, “थोड़ा जोर से…” मैंने रफ्तार बढ़ाई और आखिर में पूरा हमाच-हमाच कर चोदने लगा। वो टाँगें ऊपर करके चुदवाने लगी, पागलों की तरह बोली, “हाय संजू जी… आज पूरा दिन कसकर चोद दो… मैं आपकी हो गई… आज ही मेरे पेट में अपना बच्चा डाल दो… और जोर से…”
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वो झटके से लिपट गई और चीखी, “आह्ह संजू जी… मैं मर गई… मेरी चूत से पेशाब निकलेगा… निकाल लो…” मैंने कहा, “निकलने दो” और कसके धक्के मारे। उसका गरम रस लंड पर लगा। वो बुरी तरह झड़ रही थी, मुझे चिपककर चूतड़ झटके दे रही थी। ज़िंदगी में पहली बार लंड से चुदकर झड़ी।

मैंने रफ्तार थोड़ी धीमी की ताकि देर तक टिकूँ। उसे चूमा, चुचियाँ चूसीं और फिर शुरू। धीरे से पूछा, “चंचल, मुझे से चुदवाने में बुरा तो नहीं लगा ना?” वो मुझे और कसकर जकड़कर नीचे से चूतड़ उचकाते हुए बोली, “नहीं संजू जी… मेरी जवानी तुम्हारे नाम हो गई। 
जब चाहो, जहाँ चाहो डुबकी लगा लो। चुदाई में इतना मज़ा है, मुझे पता ही नहीं था। आज तुमने मुझे औरत बनाया… मोटे लंड से मेरी चूत का दरवाज़ा खोला… और मुझे बच्चा भी दोगे।”

ये सुनकर मैं और जोश में आ गया। कमर हिलाकर चोदने लगा। वो भी हर शॉट का जवाब कंबर उचकाकर दे रही थी। कमरे में फिर फच-फच की मधुर आवाज़ गूँजने लगी। वो टाँगें ऊपर करके मेरी कमर पर कस लीं और ज़ोर-ज़ोर से चूतड़ उचकाकर चुदवाने लगी। मैंने स्पीड बढ़ाई। 

उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ा, फच-फच और तेज़। वो हाँफते हुए बोली, “मैं तो गई… तुम्हारी रानी गई… उई माँ क्या ज़ालिम लौड़ा है… चोद डाला मुझे… मैं गईईई!”

मैं भी नहीं रुका। उसकी चूत इतनी गरम थी कि 4-5 तेज़ धक्कों बाद मैंने आखिरी धक्का मारा – सुपारा बच्चेदानी को धक्का देता हुआ और लंड ने पिचकारी मारते हुए ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मैं भी झड़ गया और चूमते हुए लंड अंदर तक डाले उसके ऊपर लेट गया।

वो कसकर लिपट गई और कान में बोली, “अभी बाहर मत निकालना… बच्चा होने के लिए पूरा पानी बच्चेदानी में जाना ज़रूरी है।” मैं लंड अंदर डाले ही लेटा रहा। फिर हाथ नीचे ले जाकर चूत टटोली – हाथ पर खून लगा। 

वो बोली, “अब विश्वास हो गया ना? मैंने आपको बिना चुदी चूत दी है।” मैंने कहा, “हाँ चंचल, आज से तुम मेरी जान हो, मेरी रानी। तुमने अपना कुंवारा शरीर मुझे सौंपा।”

15-20 मिनट बाद उठा। उसकी चूत ने सारा पानी सोख लिया था। थोड़ा बाहर आया तो खून से लाल। मैंने कहा, “अजीब बात है – तुम्हारी दीदी यानी मेरी भाभी की सील भी इसी बेड पर मैंने तोड़ी थी, शादी के चार दिन बाद। आज तुम्हारी भी। 

दोनों बहनों को एक ही बेड पर औरत बनाया।” वो हँसकर बोली, “बहुत अच्छा हुआ। इसलिए दीदी शादी के नौ महीने बाद माँ बनीं… अब नौ महीने बाद मैं भी बनूँगी।”

उस दिन मैंने उसे शाम चार बजे तक पाँच बार चोदा। हम दोनों नंगे ही लिपटे रहे। बाद में तीन साल तक लगातार चोदकर दो बच्चे पैदा किए। पहली बार में ही वो प्रेग्नेंट हो गई। किसी बहाने पति को बुलाया, वो कर तो कुछ नहीं पाया लेकिन बच्चे की खबर पर खुश होकर ले गया। 

उसे अपनी कमज़ोरी का पता था, इसलिए चुप रहा। अब वो ससुराल में खुश है, इलाज भी करा लिया। उसे शक तो है कि दोनों बच्चे मेरे हैं – शक्ल मेरी जैसी है।

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अब वो मुझे अपने यहाँ नहीं आने देता, चंचल को भी नहीं भेजता। लेकिन चंचल मौका निकालकर मुझसे मिलती है। महीने में 2-3 दिन मेरे साथ रहती है और मैं उसे 4-5 बार चोद डालता हूँ।

अब आपका रिप्लाई इंतज़ार है…

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