जैसी करनी वैसी भरनी

हमारे घर की आर्थिक स्थिति की वजह से हम लोगों को हमारे पड़ोस में रहने वाले दुकानदार से पैसे लेने पड़ेंगे लेकिन वह हमें एक शर्त पर पैसे देना चाहता था, उसने हमसे कहा कि आपको अपने घर के कागजात गिरवी रखने पड़ेंगे। मैं जब उनके पास तो मैने उनसे कहा कि भैया मैं आपको कुछ दिन बाद पैसे दे दूंगा मुझे आप मेरे घर के पेपर दे दीजिएगा, वह कहने लगे हां क्यों नहीं भाई साहब आप जब मुझे पैसे दे देंगे तो आप अपने घर के पेपर ले लीजिएगा लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह बहुत ही चालक किस्म का व्यक्ति है मैं उसके चंगुल में फंस चुका था मैंने उसे पैसे दे दिए और वह मुझे कहने लगा कि आज तो मैं पेपर लेकर आया नहीं हूं बस कल आपको मैं पेपर दे दूंगा।

मैंने भी उस पर भरोसा कर लिया और वही सबसे बड़ी गलती मेरी थी जो मैंने उस पर भरोसा कर लिया मुझे उस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं करना चाहिए था, मैं अगले दिन उसकी दुकान में गया तो वह मुझे कहने लगा मैं आज भी दरअसल वह पेपर लेकर आया नहीं हूं मैंने उसे कहा देखे भाई साहब मैंने आपको आपकी पूरी रकम लौटा दी है और आपके ब्याज के पैसे भी आप को दे दिए हैं अब तो आप मेरे घर के पेपर मुझे दे दीजिए वह कहने लगा कल आपको मैं पक्का दे दूंगा लेकिन वह मुझे हमेशा ही ऐसे टालता रहा इस बात को करीब एक महीना हो चुका था अब मेरा भी गुस्सा चरम सीमा पर पहुंच गया एक दिन मैंने उस दुकानदार के साथ झगड़ा कर लिया और उसके साथ मेरी मारपीट हो गई फिर वहां के लोगों ने हमे छुड़ाया। मुझे एक व्यक्ति ने बताया और कहा कि तुम ने इससे पैसे लेकर बहुत बड़ी गलती की है यह बहुत ही गिरा हुआ इंसान है इसने पहले भी एक दो लोगों के साथ ऐसा ही किया है लेकिन मुझे उसके बारे में कुछ पता नहीं था, मुझसे यह बहुत बड़ी गलती हो गई थी।

जब इस बारे में मेरी पत्नी कावेरी को पता चला तो कावेरी मुझे कहने लगी मैं आपके साथ चलती हूं कावेरी और मैं उसके पास गए तो भी उसने हमें हमारे घर के कागजात देने से साफ तौर पर मना कर दिया मुझे डर था कि कहीं वह हमारा घर बेच ना दे क्योंकि उसके पास ही पूरे कागजात थे लेकिन वह भी किसी भी सूरत में हमें घर के पेपर देने को तैयार नहीं था मैंने उसे पैसे तो दे दिए थे लेकिन मैं उसके जाल में पूरी तरीके से फंस चुका था और मुझे उसके साथ समझौता करना पड़ा उसने मुझसे बहुत ही कम दामों पर मेरा घर खरीद लिया और कुछ समय बाद मैंने वहां से छोड़ कर दूसरी जगह एक नया घर ले लिया लेकिन अब तक मेरे दिमाग में मेरे साथ हुए अन्याय को लेकर बात चलती रही और हमेशा कावेरी मुझे ताने मारा करती, कावेरी मुझे कहती कि आपने गुप्ता पर भरोसा कर के बहुत गलती की मैंने अपनी पत्नी से कहा मुझे क्या पता था कि वह इतना ज्यादा गिरा हुआ इंसान होगा यदि मुझे ऐसा मालूम होता तो मैं कभी भी उससे पैसे नहीं लेता उस वक्त मेरा काम भी कुछ ठीक नहीं चल रहा था  इसलिए मुझे उस वक्त उससे पैसे लेने पड़े मुझे नहीं पता था कि मुझे उससे पैसे लेना बहुत भारी पड़ेगा यदि मुझे मालूम होता तो शायद मैं कभी भी उससे पैसे नहीं लेता और यही मेरी सबसे बड़ी भूल थी इसी वजह से तो मेरे साथ इतना बड़ा अन्याय हुआ और मुझे बहुत ही कम दामों पर अपना घर बेचना पड़ा। सबसे पहले तो मेरी समस्या यह थी कि मुझे अपने कारोबार को अच्छे से सेट करना था जिसके बाद ही मैं कोई निर्णय ले पाता इसलिए मैं अपने कारोबार को अब पूरी तरीके से जमाने में लग गया और कुछ समय बाद मेरा काम भी अच्छा चलने लगा मेरा काम अब इतना अच्छा चलने लगा था कि मेरे पास पैसे की कोई कमी नहीं थी और जो नुकसान मेरा पहले हुआ था उसकी भी मैं भरपाई कर चुका था। एक दिन मुझे मेरी पत्नी ने कहा कि मुझे आज गुप्ता मिला था और वह मुझे बड़े ही घूर कर देख रहा था मैंने अपनी पत्नी से कहा मुझे उस गुप्ता को देखना ही पड़ेगा जो गुप्ता ने उस वक्त मेरे साथ बहुत गलत किया था मैं अपनी कार से गुप्ता की दुकान की तरफ चला गया और जब मैंने अपनी गाड़ी को गुप्ता के दुकान के आगे रोका तो वह मुझे  देख कर कहने लगा अरे राजेश भाई आजकल आप दिखाई नहीं देते, मैंने उसे कहा जैसे तुम्हें पता ही नहीं है कि मैं कहां रहता हूं।

मुझे उससे बात करने का बिल्कुल भी मन नहीं होता लेकिन मैं जानबूझकर उस दिन उसके पास गया था मैंने उसे बताया कि कुछ दिनों पहले तुम्हें मेरी पत्नी कावेरी दिखी थी और तुम उसे बड़े घूर कर देख रहे थे वह मुझे कहने लगा अरे ऐसे ही बस देख रहा था मैंने उसे कहा थोड़ा तुम अपनी नजरों  को नीचे करके चला करो वह कहने लगा ठीक है आज के बाद आपकी पत्नी की तरफ भी नहीं देखूंगा। मैं वहां पर ज्यादा देर नहीं रुका और वहां से चला गया लेकिन उसे देख कर मुझे अपने मुसीबत के दिन याद आते हैं जब मैंने उससे मुसीबत में पैसे लिए थे और उसने मेरा नाजायज फायदा उठाया और मैं उससे किसी भी हालत में उसका बदला लेना ही चाहता था और उसका भी मैं नुकसान करना चाहता था जिससे कि वह भी मेरे पास आये और मुझसे माफी मांगे लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, मेरा काम भी अच्छा चल रहा था और मुझे अपने लिए भी समय मिल जाता था कावेरी के साथ मैं ज्यादा से ज्यादा समय बिताया करता लेकिन जब भी मैं अपने घर के बारे में सोचता तो हमेशा मुझे वही बात याद आती और गुप्ता का चेहरा मेरी नजरों के सामने होता।

एक दिन मैंने गुप्ता को फोन किया और उसे कहा मुझे तुमसे पैसे चाहिए थे वह मुझे कहने लगा क्या बात है आज तुम्हारी अकड़ फिर से निकल गई और तुम्हें मुझसे पैसों की जरूरत है, मैंने उसे कहा हां मुझे तुमसे पैसों की जरूरत थी उसने मुझे कहा तो मेरे घर पर आ जाओ, मैं तो सिर्फ यह देखना चाहता था कि उसके घर की स्थिति क्या है और उसके घर में कौन-कौन रहता है इसलिए मैं उसके घर पर चला गया जब मैं उसके घर पर गया तो मैंने देखा उसका परिवार तो बहुत बड़ा है और उसके परिवार में उसकी पत्नी और उसके चार बच्चे हैं उसके दो लड़के तो नौकरी करते हैं उनकी दोनों लड़कियां कॉलेज में पढ़ती हैं मैंने उसे अपने घर के नकली कागज दे दिए और कहा मुझे पैसे चाहिए उसने उस दिन ना जाने मुझे कैसे पैसे दे दिए उसका ध्यान भी बिल्कुल नहीं था और मुझे उसने जब पैसे दिए तो मैं वहां से अपने घर चला आया और उस दिन मैं बहुत ज्यादा खुश था कुछ दिनों बाद मेरे पास गुप्ता आया वह कहने लगा तुमने मुझे अपने घर के नकली कागज दिए हैं, मैंने उसे कहा नहीं यह तो मेरे घर के ही पेपर है वह मुझे कहने लगा यह किसी और के घर के पेपर हैं। अब उसकी तबियत खराब हो चुकी थी क्योंकि मैंने भी उसके साथ अब वही किया था जो उसने मेरे साथ किया था उसने मुझसे माफी मांगी और कहने लगा तुम मुझे मेरे पैसे वापस लौटा दो नहीं तो मैं कहीं का भी नहीं रहूंगा इतने पैसों को नुकसान मैं बिल्कुल भी नहीं झेल सकता मैंने उसे कहा मैं तुम्हें पैसे वापस नहीं लौटा सकता वह उसके बाद चुपचाप अपने घर चला गया। मैं बहुत ज्यादा गुस्सा था अब गुप्ता के चेहरे पर भी वही तनाव था जो पहले मेरे चेहरे पर रहता था। एक दिन मैंने गुप्ता की लड़की को एक लड़के के साथ देखा और उसकी कुछ तस्वीरें ले ली मुझे पता चला कि उसकी लड़की तो एक नंबर की जुगाड़ है। मैंने उसकी लड़की को भी अब अपने बस में कर लिया था और उसे पैसे का लालच देकर अपने पास बुला लिया।

उसका पूरा परिवार ही लालची था उसकी लड़की भी बहुत ज्यादा ठरकी थी, मुझे क्या पता था कि वह अपने बाप से एक कदम और आगे है उसने ना जाने कितने लड़कों को अपने जाल में फंसाया हुआ था और उन्हें अपने बदन की गर्मी से अपने पास बुलाया करती उसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया करती। जब मुझे यह बात पता चली तो मैंने गुप्ता कि लड़की को अपने बस में कर लिया और जब वह मेरे घर पर आई तो उस दिन मैंने कावेरी को कहीं बाहर भेज दिया था। गुप्ता की लड़की का नाम सविता है जब वह मेरे पास आई तो मैंने उसे अपनी गोद में बैठा लिया। उसकी बड़ी गांड मेरे लंड से टकराती तो मुझे बहुत मजा आने लगा और उसे भी अच्छा लगने लगा उसने उस दिन जींस और टीशर्ट पहनी हुई थी मैंने उसके बदन से सारे कपड़े उतार दिए और उसे नंगा कर दिया। जब मैंने उसे नंगा किया तो उसका बदन देखकर मैं उस पर पूरी तरीके से मोहित हो गया जैसे ही मैंने उसके स्तनो को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो उसे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा और मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा।

काफी देर तक मैं उसके स्तनों और उसके निप्पल का रसपान करता रहा जब उसे भी मजा आने लगा तो मैंने उसकी योनि को बहुत देर तक चटा। मेरे लंड को उसने बहुत देर तक सकिंग किया और उसे भी बहुत मजा आया। उसने मेरे लंड को इतने देर तक रसपान किया कि मुझे बहुत मजा आया मैंने जब उसकी मखमली चूत मे अपने लंड को डाला तो मुझे एक अच्छा एहसास हुआ। उसकी चूत बहुत ही टाइट थी मैं उसे लगातार तेज गति से धक्का मारता रहा और उसकी योनि का भरपूर मजा लेता रहा जब मेरा वीर्य गिर गया तो मुझे भी बहुत अच्छा महसूस होने लगा लेकिन उसकी बड़ी गांड देखकर मेरा मन मचलने लगा। मैंने उसकी गांड भी मारी उसकी गांड मारने में मुझे बहुत मजा आया। गुप्ता मेरे पास कुछ दिनों बाद आया और मुझे कहने लगा मेरे पैसे लौटा दो लेकिन मैंने उसके पैसे भी नहीं लौटाए और अब भी वह मेरे आगे नाक रगडने को भी तैयार है, उसकी बेटी सविता भी मुझसे चुदकर जाती है। गुप्ता ने मेरे साथ गलत किया था मैंने भी उसके साथ हिसाब बराबर कर लिया है।


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