जीवन बदलने की खुशी

मुझे रचना से प्यार हो जाता है लेकिन मेरा प्यार सिर्फ एक तरफा ही था। रचना मेरी चाची की भतीजी है मैं जयपुर में उसे मिला तो उस वक्त उसकी शादी तय हो चुकी थी और उसकी सगाई भी हो चुकी थी लेकिन हम दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी परंतु मैंने कभी भी उसे अपने दिल की बात नहीं कही मैं उसे दिल ही दिल से चाहता रहा, मैं हमेशा ही सोचता था कि उसे मैं अपना बनाऊं लेकिन ऐसा कभी हो नहीं पाया और उसकी शादी हो गई, जब उसकी शादी हुई तो मैंने उसका ख्याल अपने दिलो दिमाग से हटा दिया और मैं अपने पिताजी के साथ उनके कारोबार में हाथ बढाने लगा। इस बात को काफी साल हो चुके थे और धीरे-धीरे समय भी बीता जा रहा था मेरे लिए भी लड़कियों के रिश्ते आने लगे थे लेकिन मैं उस वक्त शादी नहीं करना चाहता था मेरा पूरा ध्यान मेरे पिताजी के कारोबार पर था और मैं उसे ही आगे बढ़ाना चाहता था मैंने यह बात अपने माता पिता से कह दी थी कि मुझे आप लोग शादी के लिए थोड़ा समय दीजिए इसलिए उन्होंने भी मुझे शादी के लिए समय दिया।

मैं अपने काम पर तो लगा ही हुआ था लेकिन उस दौरान मेरी एक लड़की से मुलाकात हुई उसका नाम रीमा था। रीमा से मेरे नजदीकियां बढ़ती ही जा रही थी और उससे मेरी बहुत अच्छी दोस्ती भी हो गई थी मैंने उसे रचना के बारे में भी बताया उसने मुझे कहा तुम अब रचना को भूलने की कोशिश करो, मैंने रीमा से कहा उसकी हर एक बात अब तक मेरे दिल में है और जब भी उसकी तस्वीर मेरे चेहरे के सामने आती है तो मेरे दिमाग में सिर्फ उसी का ख्याल पैदा हो जाता है, रिमा कहने लगी मैं तुम्हारी भावनाओं को समझ सकती हूं लेकिन तुम्हें अब अपने जीवन में आगे बढ़ना पड़ेगा। मैंने कुछ समय रीमा के साथ बिताने का फैसला किया और उसके साथ जितना होता मैं समय बिताता मुझे उसके साथ समय बिताना अच्छा लगता है और अब मैं अपने काम पर पूरा ध्यान देता जिससे कि काम भी अच्छा बढ़ने लगा था और मेरे पिताजी भी हमेशा मेरी तारीफ करते।  रीमा ने ही मेरे दिल से रचना के ख्याल को बुलाने में मेरी मदद की, मुझे बहुत अच्छा लगता जब भी मैं रीमा के साथ बात करता लेकिन मुझे नहीं पता था कि ज्यादा समय तक वेब भी मेरा साथ नहीं दे पाएगी, उसके माता-पिता फॉरेन सेटल हो गए और वह भी उन्हीं के साथ चली गई हम दोनों की फोन पर बातें होती रहती लेकिन मैं अब अकेला पड़ गया था और मैं जब रीमा से बात करता तो वह कहती कि तुम अपना ध्यान तो रखते हो ना, मैंने उसे कहा हां मैं अपना ध्यान रखता हूं। रीमा मेरी जिंदगी से दूर जा चुकी थी और जल्द ही मेरी जिंदगी में कंचन आने वाली थी।

जब काफी समय बाद मुझे रचना मिली तो रचना बहुत ही उदास थी उसके चेहरे पर चोट भी लगी हुई थी मैंने जब उससे पूछा कि तुम्हारे चेहरे पर यह चोट कैसे लग गई तो उसने मुझे कुछ जवाब नहीं दिया, मैंने उससे दोबारा पूछना बेहतर नहीं समझा और जब मैंने अपनी चाची से इस बारे में पूछा तो चाची रोने लगी और कहने लगी की रचना की तो जिंदगी पूरी तरीके से बर्बाद हो चुकी है उसके सास ससुर और उसके पति उसे बहुत ज्यादा परेशान करते हैं, मैंने चाची से पूछा आखिरकार ऐसा उसके साथ क्यों हो रहा है वह तो एक अच्छी लड़की है और उसने कभी भी किसी को कोई तकलीफ नहीं दी और जितना मैं उसे जानता हूं वह दिल की बहुत अच्छी है, चाची कहने लगी बेटा यह सब नसीब का खेल है हम लोगों ने भी कभी नहीं सोचा था कि उसके साथ इतना बुरा होगा लेकिन ना जाने उसके साथ इतना बुरा क्यों हो रहा है, हम लोगों ने इस बारे में उसके पति से भी बात की थी परंतु वह सिर्फ यही कहता रहता है कि आज के बाद कभी भी मैं ऐसा नहीं करूंगा परंतु उसके बाद भी हमेशा ऐसा ही होता है।

जब चाची ने मुझे उसकी दर्द भरी कहानी सुनाई तो मुझे बहुत दुख हुआ मेरे दिमाग में सिर्फ यही खयाल आ रहा था कि यदि मैंने उस वक्त रचना से अपने दिल की बात कह दी होती तो शायद मैं उससे शादी कर लेता परंतु तब बहुत देर हो चुकी थी पर मेरे पास एक रास्ता यह था कि मैं उसकी मदद कर सकता था इसलिए मैंने उसकी मदद करने की सोची, मैंने रचना का नंबर अपनी चाची से ले लिया था और मैं उसे हर दिन फोन किया करता। जिस दिन उसका बर्थडे था उस दिन मैंने एक होटल में पार्टी भी रखी थी लेकिन यह बात मैंने किसी को नहीं बताई और उससे उसके चेहरे पर बहुत खुशी थी उसके चेहरे की खुशी देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसके जीवन में जितनी भी तकलीफ थी उन्हें मैं धीरे-धीरे दूर करता जा रहा था, रचना को भी शायद मुझसे प्यार होने लगा था लेकिन हम दोनों के बीच में अब शादी नहीं हो सकती थी क्योंकि रचना पहले से ही शादीशुदा थी और उसके पति ने उसे ना तो तलाक दिया था और ना ही वह उसे तलाक देना चाहता था रचना को वह लोग एक नौकरानी की तरह समझते थे और इससे ज्यादा उन्होंने उसे कभी भी इज्जत नहीं दी। मेरे दिल में भी रचना के लिए पुराना प्यार जागने लगा था और मैं उसे अपना बनाना चाहता था लेकिन यह संभव नहीं हो सकता था हम दोनों ने एक दूसरे से कभी भी इस बारे में बात नहीं की लेकिन मुझे यह तो समझ आ चुका था कि रचना भी अब मुझसे प्यार करने लगी है और उसे मेरे प्यार का एहसास हो चुका है। मैं जब भी उसे फोन करता या फिर उससे मिलता तो वह मेरे फोन का बेसब्री से इंतजार करती है और जब भी वह मुझे मिलती तो उसके चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान मुझे देखने को मिलती, मैंने कभी सोचा भी नहीं था की रचना के साथ इतना बुरा होगा लेकिन मैंने काफी हद तक उसके जीवन में दोबारा वह खुशियां लौटा दी थी जिससे कि अब वह पहले से ज्यादा खुश थी, उस दिन रचना कुछ ज्यादा खुश थी उसने उस दिन मुझे गले लगा लिया और कहने लगी तुम्हारी वजह से ही मेरे जीवन में अब पहले जैसी खुशियां लौट आई हैं और मैं अब तुम्हारे साथ ही जीवन बिताना चाहती हूं, मैंने रचना को समझाया और कहा कि तुम्हारी शादी हो चुकी है और अब यह संभव नहीं है, रचना कहने लगी मुझे पता है कि मेरी शादी हो चुकी है मैंने भी इस बारे में बहुत सोचा लेकिन मुझे भी जब एहसास हुआ कि मैं तुमसे प्यार करने लगी हूं तो मैंने तुमसे अपने दिल की बात कह दी।

मैं भी भला अपने आपको कितनी देर तक रोक पाता मैंने भी रचना को गले लगा लिया और उसे कहा मैं तो तुमसे पहले से ही प्यार करता हूं लेकिन मैं तुम्हें अपने दिल की बात कह ना सका शायद इसीलिए आज तुम्हें यह सब झेलना पड़ रहा है। रचना मेरे प्यार को समझ चुकी थी परंतु हम दोनों एक दूसरे के साथ कभी भी शादी नहीं कर सकते थे लेकिन हम दोनों ने साथ में रहने का निर्णय कर लिया था मैं ज्यादातर समय रचना के साथ ही बिताया करता। मैंने एक दिन रचना को एक लाल रंग की साड़ी गिफ्ट की और जब वह साड़ी पहनकर मेरे सामने आई तो उस दिन उसकी पतली कमर देखकर मेरे अंदर जैसे सेक्स करने की भावना पैदा हो गई मैंने यह बात रचना से कही लेकिन रचना तो मेरी इस बात को पूरी तरीके से नकार गई परंतु मैंने उसे अपने प्यार की कसम दी तो वह कहने लगी मुझे अब तुम्हारे साथ किसी भी हाल में सेक्स करना है। मैं उसे लेकर अपने घर चला आया जब वह मेरे घर पर आई तो मैंने उसे अपने बिस्तर पर लेटाया और धीरे-धीरे उसकी साड़ी को अपने हाथों से खोलो जब मैंने उसके पेटीकोट को उतारा तो उसने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी और उस पैंटी में वह बड़ी सेक्सी लग रही थी। जब मैंने उसके टाइट ब्लाउज को खोलो तो मुझे उसकी ब्रा उतारने में बड़ा आनंद आया जैसे ही मैंने उसके स्तनों पर अपने हाथ को रखा तो उसका टेंपरेचर बढ गया था।

मैंने जब अपनी जीभ को उसके स्तनों पर लगा कर चूसना शुरू किया तो वह बड़े ही जोश में आ गई और मुझे कहने लगी मैं ज्यादा देर तक अपने आपको कंट्रोल नहीं कर पाऊंगी। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया उसकी चूत बड़ी टाइट लग रही थी मैं उसे धक्के दिए जा रहा था मेरा 9 इंच का लंड उसकी चूत में जा चुका था। रचना कहने लगी तुम्हारे लंड ने तो मेरे अंदर तहलका मचा दिया है और ऐसा एहसास मुझे कभी भी अपने पति के साथ नहीं हुआ। वह कहने लगी रोहित आई लव यू मैंने कभी भी तुमसे सेक्स करने की नहीं सोची लेकिन आज तुमने सेक्स करके मुझे खुश कर दिया। मैं उसे तेज गति से धक्के दिए जा रहा था वह अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी मैंने जब उसे उल्टा लेटाया तो उसकी चूत के अंदर जैसे ही मैंने अपने लंड को डाला तो उसकी चूत मुझे बहुत टाइट महसूस होने लगी। जब मैं उसे धक्के देता तो उसकी बड़ी चूतडे मुझसे टकराती और मेरे अंदर एक अलग ही जोश पैदा हो जाता मैं उसे तेजी से चोदता रहा लेकिन मैं ज्यादा समय तक उसकी टाइट चूत की गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाया परंतु जितने देर भी मैंने उसके मुलायम बदन की गर्मी का एहसास किया उतनी देर मुझे बड़ा अच्छा लगा। मुझे बहुत खुशी हुई कि मैं रचना के साथ सेक्स कर पाया शायद मैंने कभी भी इस बारे में नहीं सोचा था रचना और मैं अभी एक दूसरे को अपना नहीं सके हैं लेकिन हम दोनों का जब भी सेक्स करने का मन होता है तो हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स कर लिया करते हैं। रचना को भी मेरे प्यार का एहसास पूरी तरीके से हो चुका है और मैं उसे खुश रखने की हमेशा कोशिश करता हूं वह मेरे साथ बहुत खुश भी है। मैं उसे बीच बीच में कुछ गिफ्ट भी देता रहता हूं जिससे कि वह बहुत ज्यादा खुश हो जाती है और मुझे हमेशा कहती है कि तुमने तो मेरा जीवन बदल कर रख दिया है।


Share on :