लंड तो पूछ कर गांड में डालो

 मैं बिहार का रहने वाला एक गरीब परिवार से आता हूं, मेरे घर की आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण मुझे आगरा में नौकरी करनी पड़ी। मैं आगरा में एक सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी पर लग गया, मैं जिस कॉलोनी में काम करता था वहां पर अक्सर चोरी होती रहती थी और जब मैं वहां पर काम कर रहा था तो उस दौरान भी कॉलोनी में चोरी हो गई जिसके बाद कॉलनी के लोगों ने मुझे काम से निकाल दिया। मैंने उसके बाद एक फैक्ट्री में गार्ड की नौकरी कर ली, मैं रात को वहां पर ड्यूटी दिया करता था एक दिन रात को मैं ड्यूटी दे रहा था तो कुछ लोग आगे से आ रहे थे, मैं अपनी कुर्सी पर बैठा हुआ था, वह लोग मेरे पास आकर रुके और आपस में बात करने लगे उन लोगों ने बहुत शराब पी हुई थी और वह लोग बिलकुल भी होश में नहीं थे, मैंने उन्हें कहा तुम लोग यहां से चले जाओ लेकिन वह लोग वहां से गए ही नहीं और मुझसे ही उलझने लगे।

जब वह लोग मुझ से उलझने लगे तो मैंने भी उन्हें धक्का दे दिया लेकिन वह लोग काफी थे और उन्होंने मेरे जेब से पैसे और मेरा मोबाइल छीन लिया, मैं बहुत ज्यादा गुस्से में था लेकिन उस वक्त मैं कुछ भी नहीं कर सकता था वह चार पांच लोग थे और मैं अकेला ही था इसलिए मैंने चुप रहना ही बेहतर समझा और उसके बाद वह लोग वहां से चले गए। अगले दिन जब मैंने यह बात फैक्ट्री के मालिक को बताई तो उन्होंने कहा तुमने कल अच्छा किया जो उन लोगों से नहीं उलझे, उन्होंने मुझे कुछ पैसे दिये और कहा कि तुम इससे अपने लिए मोबाइल खरीद लेना। उन्हें भी पता था कि वहां पर अक्सर ऐसी घटनाएं होती रहती हैं इसलिए उन्होंने उस वक्त मुझे कुछ भी नहीं कहा और मुझे पैसे दे दिए, मैं हमेशा की तरह वहां पर ड्यूटी देता रहता, फैक्ट्री के मालिक को भी यह चिंता रहती थी कि कहीं फैक्ट्री में कुछ चोरी ना हो जाए इसलिए उन्होंने एक और गार्ड को नौकरी पर रख लिया, अब हम दोनों रात में ड्यूटी दिया करते। मुझे भी उसके बाद ज्यादा डर नहीं था हम दोनों ही साथ में ड्यूटी दिया करते उसकी और मेरी दोस्ती अच्छी होने लगी थी वह भी बिहार से ही था।

एक दिन हम लोग रात के वक्त बैठे हुए थे तो आगे से एक महिला जा रही थी तभी कुछ लड़के उसके पीछे चिल्लाते हुए दौड़ रहे थे, हम लोगों ने उन लड़कों को रोकने की कोशिश की लेकिन वह लोग नहीं रुके और उस महिला के पीछे वह लोग बड़ी तेजी से दौड़ रहे थे, मेरे हाथ में जो ठंडा था मैंने उससे एक लड़के की कमर पर बड़ी तेजी से प्रहार किया जिससे कि वह जमीन पर गिर गया और मेरे साथी ने भी उन में से एक लड़के पर अपने डंडे से बड़ी तेजी से प्रहार किया जिससे कि वह लोग वहां से भाग गए,  जब वह महिला आगे जाकर रुकी तो हमने उसे कहा तुम्हें अब घबराने की जरूरत नहीं है। उस वक्त काफी अंधेरा हो रहा था वह महिला हमारे पास आई और कहने लगी कि आपने मेरी मदद की है मैं आप लोगों को धन्यवाद कैसे कहूं, वह महिला हमें पैसे देने लगी लेकिन हम लोगों ने उससे पैसे नहीं लिए हमने कहा कि अब आप चले जाइए उसके बाद  वह महिला वहां से चली गई। कुछ दिनों बाद वही महिला दोबारा से मुझे फैक्ट्री में दिखाई दी, मैंने उससे पूछा आप यहां क्या कर रहे हैं तो उसने बताया कि मैं यहां नौकरी की तलाश में हूं उससे मुझे सारी बात बताई और कहा मेरे घर की स्थिति ठीक नहीं है इसलिए मुझे नौकरी करनी पड़ रही है, उस महिला का नाम ममता है। वह फैक्ट्री में नौकरी करने लगी, वह पढ़ी लिखी थी इसलिए उसे फैक्ट्री में अच्छी नौकरी मिल गई, वह जब भी मुझसे बात करती तो हमेशा मेरे बारे में पूछा करती। एक दिन मैंने ममता से कहा तुम तो बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी हो तो किसी अच्छी जगह नौकरी क्यों नहीं कर लेती, तो वह कहने लगी कि मैं पढ़ी-लिखी जरूर हूं लेकिन मेरा कहीं भी दूसरी जगह नहीं हो पाया इसलिए मैंने इस फैक्ट्री में काम करने की सोची। एक बार मुझे कुछ पैसों की जरूरत थी मैं उस समय बहुत परेशान था और उस दिन मैं चुपचाप बैठा हुआ था तभी ममता मेरे पास आई और मैंने उसे उसे सारी बात बताई, वह कहने लगी कि यदि तुम मुझे यह बात पहले बता देते तो मैं तुम्हारी मदद कब की कर देती। उसने मुझे कुछ पैसे दे दिये और कहा कि यह पैसे तुम रख लो, मैं उससे पैसे लेना नहीं चाहता था लेकिन उस वक्त मेरी मजबूरी थी इसलिए मैंने उससे पैसे ले लिए और वह पैसे मैंने अपने घर भिजवा दिए।

कुछ दिनों बाद ही मैंने ममता को वह पैसे वापस लौटा दिए लेकिन उसका एहसान मेरे ऊपर था, मैंने उससे कहा तुमने मेरी मदद की है मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूं, वह कहने लगी कि तुमने भी तो उस रात को मेरी मदद की थी यदि तुम लोग नहीं होते तो शायद उस दिन मेरी मदद कोई नहीं करता, मैंने उससे कहा कि वह तो हमारा फर्ज था। मेरी भी शादी नहीं हुई थी इसलिए मैं ममता की तरफ आकर्षित होने लगा और ममता भी मेरी तरफ आकर्षित होने लगी एक दिन वह मुझे अपने साथ अपने घर पर ले गई। जब हम दोनों उसके घर पर थे ना जाने हम दोनों की आंखों ही आंखों में क्या बात हुई मैंने अपने कपड़े उतार दिए। जब उसने मेरे लंड को देखा तो वह मेरी तरफ आई और उसने मेरे लंड को हिलाना शुरू कर दिया। जब वह मेरे लंड को हिला रही थी तो मेरे अंदर गर्मी पैदा होने लगी उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मुझे बड़ा अच्छा महसूस होने लगा। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए मैंने जब ममता को अपने सामने नंगा देखा तो वह कहने लगी मुझे भी कभी उम्मीद नहीं थी कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूंगी लेकिन ना जाने आज तुम्हें देखकर मुझे ऐसा क्यों लगा।

मैंने उसके स्तनों को अपने हाथों से दबाना शुरू कर दिया मैं उसके गुलाबी होठों को अपने होठों में लेकर चूसता जाता उसके अंदर भी जोश बढ़ता जाता। कुछ देर तक तो मैं उसके स्तनों और उसके होठों का ही रसपान करता रहा लेकिन जब मैंने उसे घोडी बनाकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो उसकी चूत से गर्मी निकलने लगी। उसकी चूत इतनी ज्यादा गरम हो गई कि मेरे शरीर का तापमान भी बढ़ने लगा मेरा शरीर इतना गर्म हो चुका था कि मैं उसे तेजी से चोद रहा था और वह भी आपने चूतडो को मुझसे तेजी से मिलाए जा रही थी। उसकी बड़ी चूतडो को मैंने अपने हाथों से पकड़ा हुआ था और उसकी चूत पर में तेजी से प्रहार कर रहा था लेकिन जब मैंने उसकी चूत से अपने लंड को निकालते हुए उसकी गांड में घुसाया तो उसकी गांड में मेरा लंड आसानी से चला गया। जब उसकी गांड में मेरा लंड घुसा तो उसके मुंह से चीखने की आवाज निकल पड़ी वह कहने लगी तुम तो बड़े ही जानवर किस्म के व्यक्ति हो तुमने तो बिना बताए मेरी गांड के घोड़े खोल दिए। मैंने उसे कहा तुम्हारी गांड देखकर मुझसे रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैंने तुम्हारी गांड के अंदर अपने लंड को घुसा दिया। उसके मुंह से लगातार तेज आवाज में चीख निकल रही थी मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था उसकी बड़ी चूतड़ों को मैंने अपने हाथ से कसकर पकड़ा हुआ था। उसकी चूतडो पर मेरे हाथ के निशान भी आ चुके थे और उसकी चूतडो का रंग भी लाल हो चुका था। मै लगातार तेजी से उसे धक्के दिए जा रहा था कुछ क्षणों बाद जब मेरा वीर्य पतन उसकी गांड के अंदर हो गया तो हम दोनों ने अपने कपड़े पहनते हुए एक दूसरे के साथ बैठ गए। हम दोनों आपस में बात करने लगे उसके साथ में मुझे समय बिता कर अच्छा लग रहा था और उससे बात करना भी बहुत अच्छा लग रहा था। ममता जब भी मुझे फैक्ट्री में मिलती तो वह खुश होती और मैं भी उसे देखकर बहुत खुश होता हूं लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं रही ममता का अब हमारे बॉस के साथ ही चक्कर चलने लगा है वह दोनों एक साथ रहते थे। कभी कबार वह मुझे अपनी चूत और गांड मारने का मौका दे दिया करती है मैं भी उतने से ही संतुष्ट हो जाता हूं क्योंकि उससे ज्यादा मुझे अब उससे कुछ उम्मीद भी नहीं थी।

ममता और मेरे बॉस ने एक साथ रहने का फैसला भी कर लिया था ममता मुझसे हर चीज पूछा करती थी इसलिए उसने उस दिन भी मुझसे पूछा कि क्या मुझे उनके साथ रहना चाहिए? मैंने ममता से कहा देखो यह तुम्हारा निजी मामला है इसमें मैं कुछ भी नहीं कह सकता। मैंने उससे कहा तुम्हें यह अपने आप से ही पूछना चाहिए कि क्या तुम्हें बॉस के साथ रहना चाहिए क्योंकि उनकी शादी तो पहले ही हो चुकी है और वह शादीशुदा है क्या वह तुम्हारा ध्यान रखेंगे? ममता कहने लगी हां वह मेरा ध्यान रखेंगे, मुझे उन पर पूरा भरोसा है लेकिन मुझे तो शक था कि कहीं वह ममता को धोखा ना दे दे, उन्होंने तो ममता को बहुत झूठे झूठे सपने दिखाए जिससे कि ममता उनके जाल में फंस गई ममता और बॉस साथ में रहने लगे थे क्योंकि बॉस का उनकी पत्नी के साथ कुछ ज्यादा अच्छे रिलेशन नहीं थे इसलिए वह दोनों साथ में रहने लगे थे परंतु ममता और बॉस का रिलेशन भी ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया वह एक दूसरे के साथ खुश नहीं थे यह बात मुझे ममता ने खुद बताई वह कहने लगी कि मैंने बहुत बड़ी गलती की है मुझे यह कदम नहीं उठाना चाहिए था। मैंने ममता से कहा तुम अभी भी अपना फैसला लेने के लिए आजाद हो और यदि तुम्हें ऐसा कुछ लगता है तो तुम्हें इस बारे में बॉस से बात करनी चाहिए, वह कहने लगी कि मैं अब ऑफिस छोड़ दूंगी और अब मैं उनसे कोई संपर्क नहीं रखना चाहती, ममता ने मुझे कहा कि तुम कुछ दिनों के लिए मुझे अपने साथ रख लो, मैंने ममता से कहा मैं तो एक गरीब आदमी हूं भला मैं तुम्हें कैसे अपने साथ रख सकता हूं, वह कहने लगी मैं तुम से विनती करती हूं कि तुम मुझे कुछ दिनों के लिए अपने साथ रख लो। मैंने ममता को अपने साथ कुछ दिनों के लिए रख लिया। मै रोज उसकी चूत मारा करता हूं।


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