बहन की गांड के छेद को देख कर

मेरा नाम राघव है मैं बिजनौर का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 27 वर्ष है। मैं कई समय से बेंगलुरु में ही नौकरी कर रहा हूं, मुझे बेंगलुरु में आए हुए 4 वर्ष हो चुके हैं। इन 4 वर्षों में मैंने बहुत ही उतार-चढ़ाव देखे हैं और कई बार मैं बिना नौकरी के भी रहा परंतु उसके बावजूद भी मैंने अपने घर वालों को उसके बारे में जानकारी नहीं दी क्योंकि मैं बहुत ही स्वाभिमानी किस्म का लड़का हूं। मैं कभी भी नहीं चाहता कि मैं अपने घर वालों से मदद लूं इसलिए मैंने उनसे बिल्कुल भी मदद नहीं ली। मेरे पिताजी बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं लेकिन वह भी मेरी बहन की समस्याओं से बहुत परेशान हैं, मेरी बहन के ससुराल वाले उन्हें बहुत ही परेशान करते हैं। उसकी शादी को 4 वर्ष हो चुके हैं, मेरी बहन की शादी के कुछ समय बाद ही मैं बेंगलुरु आ गया था

उसके बाद से वह बहुत परेशान हैं और हमें अक्सर फोन करती रहती है। मेरे पिताजी भी बहुत चिंतित रहते हैं क्योंकि मेरी बहन हमेशा ही दुखी रहती है और जब भी वह घर आती है तो मेरी मां भी उसे देखकर बहुत दुखी होती है इसलिए मैं हमेशा अपनी बहन को फोन कर देता हूं और उसके हाल-चाल पूछ लेता हूं। मैंने इस बार उसे फोन किया और कहा कि तुम कैसी हो तो वह कहने लगी कि मैं बिल्कुल भी अच्छी नहीं हूं और मैं बहुत ज्यादा परेशान हो गई हूं। मैंने उसे समझाया कि तुम परेशान क्यों हो,  वह कहने लगी कि मेरा मेरे पति के साथ अब बिल्कुल भी अच्छे से रिलेशन नही चल पा रहा है और मैं नहीं चाहती की ज्यादा समय तक मै उनके साथ रहूं। मैंने अपनी बहन को समझाया और कहा कि तुम इस बारे में जीजा जी से बात करो, वह कहने लगी कि मैं इतने बरसों से अपने पति से बात कर रही हूं लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक कोई हल नहीं निकला है, मैंने उन्हें किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने दी और हमेशा ही मैंने उनका साथ दिया है, उसके बावजूद भी वह ना तो मुझसे अच्छे से बात करते हैं और ना ही मेरी इज्जत करते हैं।

मुझे बहुत दुख होता है और सोचती हूं कि मुझे यह शादी नहीं करनी चाहिए थी। मेरी बहन उस दिन बहुत ज्यादा रो रही थी और मुझे भी लगा कि वह कुछ ज्यादा ही परेशान है।  मैंने उसे कहा कि तुमने इस बारे में पिताजी से बात की, वह कहने लगी कि मैंने पिताजी से भी बात की परंतु उन्हें मैं अब ज्यादा परेशान नहीं करना चाहती क्योंकि उन्होंने मेरी शादी में कोई भी कमी नहीं रखी और ना ही उन्होंने कभी भी मुझे बचपन से लेकर आज तक कोई कमी की है, अब मैं नहीं चाहती कि मैं उन्हें और परेशान करूं। मेरी बहन मुझे कहने लगी कि मैं तुम्हारे पास आ रही हूं और अब तुम्हारे साथ रहकर ही मैं काम करूंगी। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हें शाम के वक्त फोन करता हूं। उस वक्त मैं ऑफिस में था और यही सोच रहा था कि मुझे क्या करना चाहिए क्योंकि मेरी बहन को मेरी जरूरत थी और यदि मैं इस वक्त उसका साथ नहीं देता तो मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाता इसलिए मैंने अपनी बहन शीतल को अपने पास बुला लिया। मैंने उसका रिजर्वेशन करवा दिया और मैंने उसे टिकट मेल कर दी। जब वह बेंगलुरु पहुंची तो मैं उसे लेने के लिए स्टेशन गया और वह मुझे देखते ही मेरे गले लग गई, वह मेरे गले लगते ही रोने लगी। मुझे भी उसे देख कर बहुत बुरा लगा, मैं सोचने लगा कि शायद मेरी बहन बहुत ज्यादा दुखी है इसलिए मैं उसे अपने साथ अपने घर ले गया। उस दिन मैंने ऑफिस से छुट्टी भी ले ली थी। वह मेरे साथ बैठी हुई थी और मैं उससे पूछ रहा था कि क्या तुम्हारी अब जीजा जी के साथ बिल्कुल भी बात नहीं बन रही, वह कहने लगी कि अब मैं उनके घर एक पल भी नहीं रहना चाहती, मैं खुद ही कुछ काम करना चाहती हूं और अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हूं। मैंने अपनी बहन से कहा कि तुम्हें नौकरी तो मैं दिलवा दूंगा परंतु जब यह बात पिताजी को पता चलेगी तो वह बहुत गुस्सा होंगे। मेरी बहन कहने लगी कि जब तक उन्हें पता चलेगा तब तक मैं किसी अच्छी जगह नौकरी कर रही होंगी और मैं अब किसी से भी मदद नहीं लेना चाहती। मैंने उसके साथ काफी देर तक बात की, उसके बाद उसे कहा कि तुम आराम कर लो।

जब वह आराम कर रही थी तो मैं दूसरे कमरे में बैठकर सोच रहा था की मेरी बहन इतनी ज्यादा दिक्कत में है लेकिन उसने अभी तक हमें इसकी जानकारी नहीं दी। मुझे भी लगा कि वह वाकई में बहुत ज्यादा ही दुखी है। जब वह सो कर उठी तो मैंने उसके बाद उसे कहा कि मैं तुम्हारी नौकरी की बात कहीं कर देता हूं, तुम उसकी बिल्कुल भी चिंता मत करो। वह मेरे पास आकर बहुत ही अच्छा महसूस कर रही थी और वह मेरे साथ खुश भी थी क्योंकि इतने समय बाद उसने किसी के साथ खुलकर बात की थी। मैंने भी अपनी बहन की एक जगह नौकरी की बात कर ली और वह वही काम करने लगी। अब उसे काम करते हुए काफी समय हो चुका था इसलिए वह अच्छे से काम करती थी और उसे तनख्वाह भी अच्छी मिलने लगी थी। उसने मुझे भी कुछ पैसे दे दिये और कहा कि तुम यह पैसे अपने पास रखो, मैंने उसे मना किया परंतु वह कहने लगी कि नहीं यह पैसे तुम ही रखो। एक दिन शीतल  दीदी अपने ऑफिस से जल्दी आ गई थी और वह अपने कमरे में ही लेटी हुई थी। वह बहुत ज्यादा गहरी नींद में थी उसने कुछ भी कपड़े नहीं पहने थे जब मैं घर पहुंचा तो मैंने देखा शीतल दीदी नंगी है। मैं जब उसके पास गया तो उसके बड़े बड़े स्तन देख कर मेरा मूड खराब हो गया।

मैंने उसे उठाते हुए कहा कि तुम नंगी क्यों लेटी हुई हो वह कपड़े पहनने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने उसे कपड़े नहीं पहनने दिए। मै उसके स्तनों को दबाने लगा  मुझे उसके स्तनों को दबाने में बड़ा अच्छा लग रहा था उसे भी बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने जब उसके स्तन पर अपनी जीभ को लगाया तो वह पूरी उत्तेजित हो गई और कहने लगी कि तुम आज मेरी इच्छा पूरी कर दो काफी दिनों से मैंने अपनी चूत नहीं मरवाई है। मैंने उसे कहा ठीक है मैं तुम्हारी इच्छा पूरी कर देता हूं मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो उसने मेरे लंड को अपने गले के अंदर तक समा लिया और बड़े ही अच्छे से वह मेरे लंड को चूसने लगी। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था जब वह मेरे लंड को अपने गले तक ले रही थी और काफी समय तक उसने ऐसा ही किया। उसके बाद जब मैंने शीतल को डॉगी स्टाइल में बनाया तो मैंने उसकी गांड को चाटना शुरू कर दिया और बड़े अच्छे से मैं उसकी गांड को चाट रहा था। उसकी गांड का साइज 36 है और मैंने उसकी गांड और चूत को बहुत अच्छे से चाटा जिससे कि उसकी योनि से पानी बाहर निकलने लगा था मैं उसका पानी अपनी जीभ से अच्छे से चाटता। जब उससे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने मुझे कहा कि तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दो मैंने जब अपने लंड को अपनी बहन की योनि के अंदर डाला तो उसे बड़ा अच्छा महसूस हुआ और वह चिल्लाने लगी। मुझे भी बड़ा अच्छा महसूस हो रहा था जब मैं उसे धक्के दे रहा था मैंने उसकी टाइट चूतड़ों को कस कर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेज गति से उसे चोदे जा रहा था। उसे भी काफी आनंद आ रहा था और काफी देर तक मैंने उसे धक्के दिए लेकिन कुछ समय बाद वह झड़ गई और उसने अपने दोनों पैरों को आपस में मिला लिया। मैं भी ज्यादा समय तक उसकी टाइट चूत को बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरा भी वीर्य पतन उसकी योनि में हो गया। जैसे ही मेरा माल गिरा तो मैंने उसकी योनि से अपने लंड को निकाला और उसकी गांड के छेद को देखकर मेरा मन खराब हो गया। मैंने अपने लंड को हिलाते हुए शीतल की गांड के अंदर डाल दिया। जैसे ही मेरा लंड मेरी बहन की गांड में घुसा तो वह चिल्ला उठी और कहने लगी तुमने तो मेरी गांड भी फाड़ कर रख दी। मैंने उसे कहा कि अब मैं तुम्हें बड़ी तेजी से धक्के दूंगा मैंने उसे बड़ी तेज तेज धक्के मारे जिससे कि मेरा लंड बुरी तरीके से छिल चुका था लेकिन उसकी गांड के छेद से कुछ ज्यादा ही गर्मी बाहर आने लगी। मैं उसकी टाइट गांड को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया जब मेरा वीर्य पतन हुआ तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसकी बड़ी बड़ी चूतडो मे गिरा दिया।


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